गौतमबुद्ध नगर श्रमिकों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जिला प्रशासन सक्रिय, औद्योगिक क्षेत्रों में लगेंगे मेडिकल कैंप

गौतमबुद्ध नगर श्रमिकों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जिला प्रशासन सक्रिय, औद्योगिक क्षेत्रों में लगेंगे मेडिकल कैंप
गौतमबुद्ध नगर में श्रमिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगेंगे। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट सभागार में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और निजी अस्पताल संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।

गौतमबुद्ध नगर, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। गौतमबुद्ध नगर में श्रमिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगेंगे। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट सभागार में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और निजी अस्पताल संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में कार्यरत लाखों श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए समन्वित और प्रभावी व्यवस्था तैयार करना रहा। जिलाधिकारी ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर को उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी के रूप में जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं और इनमें लाखों श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन स्तर को बेहतर बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और उनके बच्चों की शिक्षा जैसे क्षेत्रों में लगातार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। जिलाधिकारी ने निजी अस्पताल संचालकों से अपील की कि वे अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) निधि का उपयोग करते हुए औद्योगिक क्षेत्रों, कंस्ट्रक्शन साइट्स और लेबर कॉलोनियों में नियमित रूप से मेडिकल कैंप आयोजित करें।

उन्होंने विशेष रूप से महिला श्रमिकों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि मेडिकल कैंपों में महिलाओं के लिए अलग और बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि इन शिविरों में श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए नेत्र परीक्षण, ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

साथ ही श्रमिक बहुल क्षेत्रों में मिनी ओपीडी, मोबाइल मेडिकल वैन और नेत्र जांच शिविर आयोजित कर जरूरतमंदों को चश्मा उपलब्ध कराने और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों का समय पर उपचार सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। कंस्ट्रक्शन साइट्स पर कार्यरत श्रमिकों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और मोबाइल मेडिकल सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

जिलाधिकारी ने सभी निजी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार करने और प्रत्येक अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिम्स अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर, दवाइयां और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रहें। जहां भी किसी प्रकार की कमी हो, उसे प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए।

इसके अलावा, आयुष्मान भारत योजना के तहत अधिक से अधिक अस्पतालों को पैनल में शामिल करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए, ताकि श्रमिकों और उनके परिवारों को अधिकाधिक लाभ मिल सके।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार, जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी टीकम सिंह, संजीव श्रीवास्तव, जिला क्षय रोग अधिकारी आरपी सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी श्रुति कीर्ति वर्मा, डीपीएम मंजीत कुमार सहित कई चिकित्सक और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

जिला प्रशासन के इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में जनपद के श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी और उनका जीवन स्तर और अधिक सुधरेगा।

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Created On :   18 April 2026 8:09 PM IST

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