गुजरात सूरत सैनिक स्कूल में आदिवासी बच्चों के सपनों को मिल रही नई उड़ान, कोई बनना चाहता अफसर तो कोई ओलंपियन

गुजरात सूरत सैनिक स्कूल में आदिवासी बच्चों के सपनों को मिल रही नई उड़ान, कोई बनना चाहता अफसर तो कोई ओलंपियन
राज्य सरकार के आदिवासी विकास विभाग के तहत गुजरात राज्य ट्राइबल एजुकेशन सोसायटी द्वारा सूरत की उमरपाड़ा तालुका के वाडी गांव में सैनिक स्कूल का संचालन किया जा रहा है। यहां पर आदिवासी बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है। कोई अफसर बनना चाहता है तो कोई ओलंपियन।

सूरत, 21 मई (आईएएनएस)। राज्य सरकार के आदिवासी विकास विभाग के तहत गुजरात राज्य ट्राइबल एजुकेशन सोसायटी द्वारा सूरत की उमरपाड़ा तालुका के वाडी गांव में सैनिक स्कूल का संचालन किया जा रहा है। यहां पर आदिवासी बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है। कोई अफसर बनना चाहता है तो कोई ओलंपियन।

इस स्कूल में अनुसूचित जनजाति के बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक की शिक्षा दी जाती है। बच्चों की पढ़ाई के साथ ही यहां अनुशासन, खेल और फिजिकल एजुकेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वजह है कि यहां के स्टूडेंट्स आज आर्मी ऑफिसर बनने और ओलंपिक्स में मेडल जीतने के सपने देख रहे हैं।

छात्रा दिव्याबेन पंगी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि इस स्‍कूल में आने के बाद मैं अनुशासित हुई हूं। यहां पर पढ़ाई के साथ-साथ भविष्‍य में हमें क्‍या करना है, इसको लेकर मोटिवेट किया जाता है। मैं आर्मी अधिकारी बनना चाहती हूं।

छात्र नील गामित ने कहा कि हमारी एक घंटे की परेड होती है, जिसमें हमें अनुशासन के बारे में सिखाया जाता है, क्योंकि जो आर्मी की परेड है वो डिसिप्लिन वाली होती है। परेड में हमें सावधान विश्राम से लेकर ए टू जेड पीटी परेड और फ्लैग मार्चिंग फ्लैग सैल्यूट कराया जाता है।

सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल जयदीप सिंह राठौड़ ने कहा कि सैनिक स्कूल कक्षा 6 से 12 तक है, जिसमें कई बच्चे हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। राज्य सरकार ने लगभग 50 करोड़ रुपए के खर्च से आधुनिक मैदान के साथ 20 एकड़ में स्कूल कैंपस का निर्माण कराया है।

रिटायर्ड सूबेदार श्याम सिंह वसावा ने बताया कि यहां ड्रिल परेड ग्राउंड है। हम बच्चों को सिखाने के लिए सारी सुविधा खुद ही उपलब्ध करवाते हैं और डिफेंस में जाने के लिए इन ट्राइबल बच्चों को एक अच्छा मौका मिले, इसलिए हम यहां उन्हें फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं।

इस सैनिक स्कूल में 372 आदिवासी छात्र पढ़ रहे हैं, जहां उन्हें पढ़ाई के साथ ही खाने और रहने की सुविधा मुफ्त प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार सैनिक स्कूल के हर छात्र के लिए प्रति वर्ष 80,000 रुपए की ग्रांट दे रही है। 20 एकड़ में फैले स्कूल कैंपस में स्टूडेंट्स के लिए मॉडर्न सुविधाओं से लैस बिल्डिंग, स्मार्ट क्लासरूम, मेस, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के साथ 400 मीटर का ग्राउंड, लाइब्रेरी, केमिस्ट्री, फिजिक्स, बायोलॉजी और कंप्यूटर लैब की सुविधाएं हैं।

स्कूल के बच्चों के फिजिकल और मेंटल डेवलपमेंट के लिए कई एक्टिविटीज करवाई जाती हैं। साथ ही आर्मी में एंट्री के लिए रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर्स द्वारा स्टूडेंट्स को खास प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार आदिवासी इलाकों के युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए प्रयासरत है। इसी कड़ी में सूरत का यह सैनिक स्कूल आदिवासी बच्चों को स्पोर्ट्स में आगे ले जाने के साथ ही उन्हें देश की रक्षा के लिए एक सैन्य अफसर के रूप में तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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Created On :   21 May 2026 9:55 PM IST

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