गुजरात सुरेंद्रनगर का वढ़वाण 'बांधणी कला' का हब, 75 फीसदी आबादी की आजीविका का बना सहारा

गुजरात  सुरेंद्रनगर का वढ़वाण बांधणी कला का हब, 75 फीसदी आबादी की आजीविका का बना सहारा
गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की वढ़वाण तालुका की बांधणी कला केवल एक हस्तशिल्प नहीं है, बल्कि सैकड़ों वर्षों की धरोहर है। हाथ की बारीक टाई-डाई तकनीक से तैयार की जाने वाली ये कला आज भी अपनी मौलिकता और सुंदरता के लिए देश-विदेश में विशेष पहचान रखती है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित हुई यह कला वढ़वाण के हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन बन चुकी है।

सुरेंद्रनगर, 26 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की वढ़वाण तालुका की बांधणी कला केवल एक हस्तशिल्प नहीं है, बल्कि सैकड़ों वर्षों की धरोहर है। हाथ की बारीक टाई-डाई तकनीक से तैयार की जाने वाली ये कला आज भी अपनी मौलिकता और सुंदरता के लिए देश-विदेश में विशेष पहचान रखती है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित हुई यह कला वढ़वाण के हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन बन चुकी है।

वढ़वाण में बांधणी आर्ट को संजोने और संवारने में सबसे बड़ा योगदान यहां की महिला कारीगरों का है। ज्यादातर परिवारों की महिलाएं बांधणी का काम करती हैं और आत्मनिर्भर बनने के साथ ही परिवार चलाने में अपनी भागीदारी निभा रही हैं।

श्रद्धा बेन ने बताया, "मैं बांधणी का काम करती हूं और आजीविका चलाती हूं। घरेलू काम करने के साथ बांधणी का काम करती हूं और 250 से 300 रुपए कमाती हूं। यह बांधणी देश-विदेश में हर जगह जाती है। वढ़वाण में 80 प्रतिशत लोगों की आजीविका इसी से चलती है। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं।"

वढ़वाण की लगभग 75 फीसदी आबादी सीधे या परोक्ष रूप से बांधणी उद्योग से जुड़ी है। साड़ी, ड्रेस और दुपट्टे जैसे प्रमुख बांधणी प्रोडक्ट यहां की पहचान बन चुके हैं। बांधणी के पारंपरिक रंग और डिजाइन आज बदलते दौर के साथ नए रूप में बाजार तक पहुंच रहे हैं, जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों खुश हैं।

बांधणी कारोबारी दीपकभाई खत्री ने बताया, "मेरी एक डाइंग फैक्ट्री है, और माल तैयार होने के बाद मैं उसे अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, और बेंगलुरु के होलसेल मार्केट में पूरे इंडिया लेवल पर सप्लाई करता हूं, और वहां से हमारी बांधणी इंडस्ट्री विदेश में भी फैल रही है।"

एक खरीदार ने कहा कि बांधणी कभी पुरानी नहीं होती और वढ़वाण की बांधणी बहुत फेमस है। इसका ट्रेंड कभी कम नहीं होता और गर्मियों में पहनने में यह बहुत आरामदायक होती है। वढ़वाण जैसी बांधणी आपको कहीं और नहीं मिलेगी।

गुजरात सरकार ने हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं को नई पहचान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, जिनका सीधा लाभ इन बांधणी कारीगरों और व्यापारियों को मिल रहा है।

उप उद्योग आयुक्त एस.बी. परेजिया ने बताया, "राज्य सरकार की कई योजनाएं जैसे केबल स्कीम, डीटीवाई स्कीम, और मानव कल्याण योजना डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रीज ऑफिस से लागू की जाती हैं। हमारे जिले के वढ़वाण तालुका में बांधणी के काम में लगे कर्मचारी भी इन योजनाओं का लाभ उठाते हैं।"

वढ़वाण की बांधणी कला को मिल रहे सरकारी प्रोत्साहन और वोकल फॉर लोकल अभियान की वजह से ये हस्तशिल्प आज न केवल रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि महिला सशक्तीकरण का भी माध्यम बन गया है। कुल मिलाकर बांधणी कला के विस्तार से आज जहां स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, वहीं समृद्ध गुजरात का सपना भी साकार हो रहा है।

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Created On :   26 Aug 2026 11:51 PM IST

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