भारत के 104 हवाई अड्डे अब 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित नागर विमानन मंत्री
नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने सोमवार को घोषणा की कि भारत के 104 हवाई अड्डे अब 100 प्रतिशत नवीकरणीय (रिन्यूएबल) ऊर्जा से संचालित हो रहे हैं। यह उपलब्धि देश में विमानन अवसंरचना (एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर) को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, "भारत के 104 हवाई अड्डे अब 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित हो रहे हैं, जबकि 2014 में यह संख्या शून्य थी।"
मंत्री ने आगे कहा, "नया भारत केवल बातें नहीं कर रहा, बल्कि सतत विकास के लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित वर्ष 2070 तक 'नेट जीरो' लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है।"
इस उपलब्धि का अर्थ है कि ये 104 हवाई अड्डे अपनी परिचालन संबंधी बिजली की पूरी आवश्यकता नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी कर रहे हैं। इसमें एयरपोर्ट परिसर में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों से उत्पन्न बिजली के साथ-साथ जलविद्युत (हाइड्रोपावर) जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का भी उपयोग किया जा रहा है, जिसे दीर्घकालिक समझौतों के तहत खरीदा जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत के हवाई अड्डा क्षेत्र ने स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने में लगातार वृद्धि की है।
जून 2022 में दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट बना था, जिसने अपनी पूरी बिजली की जरूरत सौर ऊर्जा और जलविद्युत के संयोजन से पूरी करनी शुरू की।
दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डीआईएएल) के अनुसार, एयरपोर्ट की करीब 6 प्रतिशत बिजली उसके अपने सौर ऊर्जा संयंत्रों से आती है, जबकि शेष 94 प्रतिशत बिजली दीर्घकालिक जलविद्युत खरीद समझौते के तहत प्राप्त की जाती है।
इस पहल से हर वर्ष लगभग 2 लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है।
वहीं, कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा वर्ष 2015 में पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला दुनिया का पहला एयरपोर्ट बना था। इसके बाद एयरपोर्ट ने अपनी सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लगातार विस्तार किया और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हासिल की।
यह ताजा उपलब्धि नागर विमानन मंत्रालय की जून 2026 की उस घोषणा के बाद सामने आई है, जिसमें बताया गया था कि 88 से अधिक भारतीय हवाई अड्डे पहले ही 100 प्रतिशत हरित ऊर्जा पर संचालित हो चुके हैं।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश के सभी हवाई अड्डों को नेट-जीरो उत्सर्जन वाला बनाना है, ताकि भारत के विमानन क्षेत्र को पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सके।
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Created On :   13 July 2026 7:05 PM IST












