कोलकाता एयरपोर्ट पर बैंकॉक से आए यात्री के बैग से 707 रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुए बरामद

कोलकाता एयरपोर्ट पर बैंकॉक से आए यात्री के बैग से 707 रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुए बरामद
भारतीय कस्टम विभाग की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (एआईयू) के अधिकारियों ने बुधवार रात 700 से अधिक रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुए बरामद किए।

कोलकाता, 23 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय कस्टम विभाग की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (एआईयू) के अधिकारियों ने बुधवार रात 700 से अधिक रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुए बरामद किए।

बुधवार रात कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बैंकॉक से आए एक यात्री के सामान से कछुओं की एक ऐसी प्रजाति बरामद हुई, जिसे दुनिया की 100 सबसे आक्रामक प्रजातियों में शामिल किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात बैंकॉक से एक उड़ान कोलकाता एयरपोर्ट पहुंची। इस दौरान जब यात्री ग्रीन चैनल से गुजर रहा था, तभी एआईयू अधिकारियों को उसके सामान के अंदर कुछ हलचल महसूस हुई।

एआईयू अधिकारियों ने तुरंत यात्री को हिरासत में लिया और उसके सामान की जांच शुरू की। तलाशी के दौरान उसके एक बैग से कुल 707 कछुए बरामद हुए। बाद में पुष्टि हुई कि ये सभी कछुए 'रेड-ईयर्ड स्लाइडर' प्रजाति के हैं।

यात्री को वन्यजीव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। एआईयू अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं कि ये जिंदा कछुए कहां से लाए गए थे और इन्हें कहां ले जाया जा रहा था।

भारतीय पालतू पशु बाजार में रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुओं की काफी मांग है। इसके दो मुख्य कारण बताए जाते हैं। पहला, भारत में पाए जाने वाले कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पूरी तरह संरक्षित हैं, इसलिए कुछ लोग रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुओं को अवैध और अनौपचारिक तरीकों से मंगाने की कोशिश करते हैं।

दूसरा कारण यह है कि भारत में इस प्रजाति की काफी मांग है। इसके शरीर पर मौजूद आकर्षक लाल निशान और इसे आसानी से पालतू जानवर के रूप में रखने की वजह से लोग इसे पसंद करते हैं।

रेड-ईयर्ड स्लाइडर कछुओं का आयात पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, क्योंकि यह एक आक्रामक और नुकसान पहुंचाने वाली प्रजाति मानी जाती है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में 'रेड-ईयर्ड स्लाइडर' कछुओं की तस्करी का सबसे बड़ा खतरा यह है कि जब लोग इन्हें पाल नहीं पाते और जल स्रोतों में छोड़ देते हैं, तो ये भारत की मीठे पानी में रहने वाली 29 कछुआ प्रजातियों के लिए खतरा बन जाते हैं। ये कछुए भोजन, धूप सेंकने की जगह और अंडे देने के स्थानों के लिए देशी प्रजातियों से प्रतिस्पर्धा करते हैं।

यह प्रजाति साल्मोनेला बैक्टीरिया की वाहक होती है, जिससे स्वास्थ्य को सीधा खतरा हो सकता है। इसका खतरा खासतौर पर बच्चों के लिए अधिक होता है।

इन बातों को ध्यान में रखते हुए कस्टम विभाग 'रेड-ईयर्ड स्लाइडर' कछुओं को वापस भेजने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाता है। जब ऐसी जीवित प्रजातियां पकड़ी जाती हैं, तो उन्हें उचित देखभाल के साथ रखा जाता है और तुरंत उनके मूल देश वापस भेज दिया जाता है, ताकि वे भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र में प्रवेश न कर सकें।

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Created On :   23 July 2026 2:12 PM IST

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