केरल बाढ़ में फंसे जानवरों को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी

केरल  बाढ़ में फंसे जानवरों को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी
केरल में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए बचाव और राहत कार्य जारी हैं, साथ ही राज्य के सबसे बुरी तरह प्रभावित जिलों में से एक, पथानामथिट्टा में हजारों फंसे हुए जानवरों को बचाने के लिए एक मानवीय मिशन भी चलाया जा रहा है।

पथानामथिट्टा, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केरल में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए बचाव और राहत कार्य जारी हैं, साथ ही राज्य के सबसे बुरी तरह प्रभावित जिलों में से एक, पथानामथिट्टा में हजारों फंसे हुए जानवरों को बचाने के लिए एक मानवीय मिशन भी चलाया जा रहा है।

'ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया' ने पथानामथिट्टा में एक आपातकालीन राहत अभियान शुरू किया है, जहां लगातार बारिश और बड़े पैमाने पर आई बाढ़ के कारण मवेशी और पालतू जानवर जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

संगठन ने केरल पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर काम करते हुए आपातकालीन चारा और पशु चिकित्सा का सामान बांटना शुरू कर दिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 20 टन सूखा पशु आहार पहुंचाया जाएगा, जबकि पशु चिकित्सा टीमें घायल और बीमार जानवरों का मौके पर ही इलाज और दवाएं उपलब्ध कराएंगी।

शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, बाढ़ ने पथानामथिट्टा जिले के 10 से ज्‍यादा गांवों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे 1,500 से ज्‍यादा मवेशी और अन्य बड़े जानवर प्रभावित हुए हैं। इस राहत अभियान से 2,500 से ज्‍यादा जानवरों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

पथानामथिट्टा में पशुपालन परिवार की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह मानसून की मौजूदा बारिश से सबसे बुरी तरह प्रभावित जिलों में से एक रहा है। बड़े इलाके अभी भी जलमग्न हैं, जिससे कई परिवारों को राहत शिविरों में जाना पड़ रहा है और वे अपने मवेशियों और अन्य जानवरों को पानी से भरे बाड़ों में छोड़ने को मजबूर हैं।

'ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया' की आपदा प्रतिक्रिया टीम के मैनेजर प्रवीण सुरेश ने कहा, "हालात हमारी उम्मीद से कहीं ज्‍यादा खराब हैं। कई जगहों पर बाढ़ का पानी कमर तक भरा हुआ है, और कुछ इलाकों में यह लगभग छह फीट ऊंचा है। जानवर सड़कों पर फंसे हुए हैं या रुके हुए पानी में खड़े हैं और उनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है। लगातार बारिश से उनकी हालत और खराब होगी।"

लोगों ने राहत कर्मियों को बताया कि मौसमी बाढ़ आम बात है, लेकिन उन्होंने 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद से इतने बड़े पैमाने पर जलभराव नहीं देखा था। पिछले वर्षों के विपरीत, जब बाढ़ का पानी एक या दो दिन में उतर जाता था, कई गांव लगभग पांच दिनों से पानी में डूबे हुए हैं।

'ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया' ने पहले भी असम, महाराष्ट्र, पंजाब और केरल में बाढ़ के दौरान इसी तरह से जानवरों के बचाव और राहत अभियान चलाए हैं।

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Created On :   7 Aug 2026 8:34 PM IST

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