बॉम्बे हाई कोर्ट: डोंबिवली में डॉक्टरों पर हमले का मामले में अदालत ने शिवसेना नगरसेवक रमेश म्हात्रे को दी जमानत

डोंबिवली में डॉक्टरों पर हमले का मामले में अदालत ने शिवसेना नगरसेवक रमेश म्हात्रे को दी जमानत
  • जब तक मामले में आरोप पत्र दाखिल नहीं हो जाती, म्हात्रे महाराष्ट्र से बाहर रहें
  • अदालत से हमले में शामिल रहे चार अन्य आरोपियों को भी मिली जमानत

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) के अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले के मामले में शिवसेना नगरसेवक रमेश म्हात्रे को जमानत दे दी। अदालत से हमले में शामिल रहे चार अन्य आरोपियों को भी जमानत मिल गई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मुकदमे की सुनवाई तेजी से और तय समय-सीमा के भीतर पूरी की जाए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने रमेश म्हात्रे और अन्य आरोपियों को कड़ी शर्तों पर जमानत देते हुए कहा कि जब तक मामले में आरोप पत्र दाखिल नहीं हो जाती, वे महाराष्ट्र से बाहर रहें। पीठ ने कहा कि एक चुने हुए नगरसेवक को "लोगों के लिए और लोगों द्वारा’ माना जाता है। अगर कोई चुना हुआ व्यक्ति अपने ही वोटरों पर हमला करता है, तो यह लोकतंत्र के मूल ढांचे पर ही हमला है। पीठ ने अपने आदेश कहा कि जब तक मामले में आरोप पत्र दाखिल नहीं हो जाती, वे महाराष्ट्र से बाहर रहें। आरोपियों को महाराष्ट्र लौटने की इजाजत तभी मिलेगी, जब ट्रायल कोर्ट मामले में आरोप तय कर देगा। तब भी वे मामले के गवाहों से संपर्क नहीं करेंगे और न ही किसी सबूत के साथ छेड़छाड़ करेंगे।

पीठ ने राज्य सरकार को मुकदमे के लिए दस दिनों के भीतर एक स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त करने का निर्देश दिया और कहा कि पुलिस अपनी जांच पूरी करने और 12 कामकाजी दिनों के भीतर स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी से रिपोर्ट मिलने के बाद उसके पांच दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल करेगी। ट्रायल कोर्ट को आरोप पत्र दाखिल होने के एक हफ्ते के अंदर आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने होंगे। एक बार ट्रायल शुरू होने के बाद अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष को बिना किसी ठोस वजह या मामूली कारणों से सुनवाई टालने की मांग करने से बचना चाहिए।

पीठ ने 18 जुलाई स्वतः संज्ञान लेते हुए निचली अदालत द्वारा म्हात्रे को दी गई जमानत पर रोक लगा दी और उन्हें पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। इसके बाद म्हात्रे ने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। पीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मामले को बहुत हल्के में लिया और म्हात्रे के आपराधिक इतिहास पर भी ध्यान नहीं दिया। अतीत में म्हात्रे के खिलाफ मारपीट के 18 मामले दर्ज किए गए थे, हालांकि उनमें से 17 मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया था। म्हात्रे और अन्य आरोपियों ने 6 जुलाई को गर्भवती महिला के परिवार वालों की शिकायत पर केडीएमसी के शास्त्री नगर अस्पताल में घूस कर डॉक्टरों से मारपीट की।

Created On :   7 Aug 2026 9:54 PM IST

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