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सावजी पर गरम सियासत: मुंढे के बयान पर मंत्री बावनकुले का पलटवार - सावजी विदर्भ की शान, रेस्टोरेंट बंद होने जैसी बातें बर्दाश्त नहीं

Mumbai News. खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे के "सावजी मटन' को लेकर दिए गए विवादित बयान पर सियासत तेज हो गई है। राज्य के राजस्व मंत्री व विदर्भ से विधायक चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को मुंढे के बयान पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि "सावजी केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि विदर्भ की पहचान और हजारों परिवारों की आजीविका है। ऐसा कोई भी बयान नहीं दिया जाना चाहिए जिससे इस कारोबार पर संकट आए या इसके रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत पैदा हो।'
दरअसल, अमरावती में एक कार्यक्रम के दौरान एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा था कि अगर मैं सावजी मटन खाऊं तो एक महीने तक बीमार पड़ जाऊंगा और अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।' उनके इस बयान से विदर्भ के सावजी रेस्टोरेंट संचालकों में भारी नाराजगी फैल गई। इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए गुरुवार को मंत्री बावनकुले ने कहा कि विदर्भ में पिछले तीन-चार पीढ़ियों से सावजी रेस्टोरेंट पूरी ईमानदारी के साथ संचालित हो रहे हैं। सावजी भोजन की अपनी पारंपरिक शैली, खास मसाले और अनोखा स्वाद ही इसकी पहचान है। विदर्भ आने वाला लगभग हर व्यक्ति सावजी भोजन का स्वाद लेना चाहता है। आज देश ही नहीं, विदेशों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसी अधिकारी द्वारा पूरे उद्योग पर एक साथ सवाल उठाना पूरी तरह अनुचित है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी होटल या रेस्टोरेंट में मिलावट, गंदगी या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रतिष्ठान पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन पूरे सावजी उद्योग को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। बावनकुले ने कहा कि "सावजी कारोबार केवल रेस्टोरेंट व्यवसाय नहीं, बल्कि हजारों परिवारों का पारंपरिक गृह उद्योग और रोजगार का बड़ा माध्यम है। इसलिए ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जिनसे पूरे उद्योग की छवि धूमिल हो और कारोबार प्रभावित हो।'
क्या है सावजी
सावजी भोजन विदर्भ, खासकर नागपुर की प्रसिद्ध पारंपरिक खाद्य शैली है। यह अपने तीखेपन, गहरे रंग और खुशबूदार मसालों के लिए जाना जाता है। सावजी मटन और चिकन इसके सबसे लोकप्रिय व्यंजन हैं। इसके खास मसाले में सूखी लाल मिर्च, धनिया, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, काली-हरी इलायची, खसखस, जायफल, जावित्री, दगड़ फूल और सूखा नारियल जैसे मसाले भूनकर पीसे जाते हैं। प्याज, अदरक-लहसुन और इस मसाले को तेल में अच्छी तरह भूनकर मटन या चिकन डाला जाता है। धीमी आंच पर पकने के बाद इसकी गाढ़ी, तीखी ग्रेवी तैयार होती है। इसे ज्वार की भाकरी या रोटी के साथ खाया जाता है।
Created On :   6 Aug 2026 10:30 PM IST
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