बांग्लादेश में नाबालिग हिंसा का बढ़ता संकट, बच्चों में गैंग कल्चर और सोशल मीडिया का असर चिंता का विषय
ढाका, 25 सितंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में बच्चों और किशोरों से जुड़ी हिंसक घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कुमिल्ला जिले में 13 वर्षीय इशायात शाहरीआर अप्रतीम की हत्या ने एक बार फिर देश में किशोर अपराध और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। द बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस हत्या ने किशोर गैंग कल्चर, पारिवारिक और सामाजिक माहौल, स्कूलों की भूमिका, सोशल मीडिया के प्रभाव और कानून-व्यवस्था की सीमाओं को लेकर व्यापक चिंता पैदा कर दी है।
ढाका विश्वविद्यालय के मानद प्रोफेसर ए. आई. महबूब उद्दीन अहमद ने कहा कि गरीबी और बेरोजगारी बांग्लादेश में किशोर अपराध बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या, बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याएं व्यापक सामाजिक और आर्थिक विफलताओं को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से संभव नहीं है। बचपन से ही परिवार, शिक्षा, रोजगार के अवसर और सामाजिक माहौल को मजबूत करना होगा, ताकि बच्चों को हिंसा और अपराध से दूर सकारात्मक विकल्प मिल सकें।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड हॉस्पिटल, ढाका के एसोसिएट प्रोफेसर हेलाल उद्दीन अहमद ने कहा कि किशोरों में गैंग कल्चर तेजी से बढ़ रहा है और इसमें सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है। उनके मुताबिक टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां कई किशोर जल्दी बड़े दिखने, आक्रामक व्यवहार अपनाने और 'कूल' दिखने की कोशिश करते हैं। कई बार वे हिंसक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।
ढाका विश्वविद्यालय के अपराध विज्ञान विभाग के अध्यक्ष रेजाउल करीम शोहाग ने कहा कि सरकार को उन आर्थिक और सामाजिक कारणों पर भी काम करना होगा, जो बच्चों को ऐसे समूहों की ओर धकेलते हैं। इनमें गरीबी, बेरोजगारी, स्कूल छोड़ना, बाल श्रम और सुरक्षित मनोरंजन स्थलों की कमी शामिल है।
उन्होंने कहा कि किशोर अपराध रोकने के लिए परिवार, स्कूल, समुदाय, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और सरकार के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं। यदि सभी संस्थाएं मिलकर समय रहते हस्तक्षेप करें तो बच्चों को गंभीर अपराध की राह पर जाने से रोका जा सकता है।
रिपोर्ट में बांग्लादेश की किशोर न्याय व्यवस्था की कमियों का भी उल्लेख किया गया है। बांग्लादेशी शोधकर्ता शाहजेब महमूद ने कहा कि देश में किशोरों के लिए पर्याप्त सुधार गृह नहीं हैं और पुनर्वास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून बच्चों के पुनर्वास के बजाय उन्हें आपराधिक न्याय प्रणाली की ओर और धकेल सकते हैं।
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Created On :   25 Sept 2026 6:41 PM IST












