बिहार पुलिस का भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, एसआई को किया बर्खास्त
पटना, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को और मजबूत करते हुए बिहार पुलिस ने गुरुवार को एक दागी पुलिस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
तिरहुत रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) चंदन कुशवाहा ने सब-इंस्पेक्टर सदरे आलम को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश दिया है। यह मामला 2021 का है, जब सदरे आलम मुजफ्फरपुर के अहियापुर पुलिस स्टेशन में तैनात थे।
सिपाहीपुर की एक शिकायतकर्ता तबस्सुम आरा ने रिश्वतखोरी के आरोपों के साथ विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो से संपर्क किया था। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 30 सितंबर 2021 को एक जाल बिछाकर सदरे आलम को 11 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह गिरफ्तारी पुलिस स्टेशन के पास एक चाय की दुकान पर हुई। इस संबंध में विजिलेंस पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया। आलम की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में एक विभागीय कार्यवाही शुरू की गई।
इस मामले की जांच मुजफ्फरपुर के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (पूर्व) की देखरेख में की गई। जांच का नेतृत्व इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर, शहरयार अख्तर ने किया। अंतिम रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से स्थापित हो गया कि भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह से साबित हो गए थे। पुलिस अधिकारी कर्तव्य में लापरवाही और अनैतिक आचरण का दोषी पाया गया।
जांच के निष्कर्षों के आधार पर डीआईजी कुशवाहा ने आलम को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया, जिससे पुलिस बल के भीतर एक कड़ा संदेश गया। एक कड़ा रुख अपनाते हुए और जांच प्राधिकरण के निष्कर्षों के साथ-साथ मुजफ्फरपुर के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसएसपी) कंतेश कुमार मिश्रा की सिफारिशों से सहमत होते हुए डीआईजी चंदन कुशवाहा ने गुरुवार को सदरे आलम को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया।
यह कार्रवाई बिहार पुलिस के अपने रैंकों के भीतर भ्रष्टाचार और कदाचार के खिलाफ कड़े रुख को उजागर करती है। अधिकारियों ने दोहराया है कि रिश्वतखोरी में किसी भी तरह की संलिप्तता पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जवाबदेही और ईमानदारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
डीआईजी कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है, जहां ईमानदारी सर्वोपरि है। बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त कर्मियों की निरंतर उपस्थिति न केवल जनता के विश्वास को कम करती है, बल्कि बल के भीतर ईमानदार अधिकारियों की प्रतिष्ठा को भी धूमिल करती है।
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Created On :   2 April 2026 9:21 PM IST












