कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा याचिका खारिज की

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा याचिका खारिज की
कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में उनके खिलाफ दर्ज सभी आठ एफआईआर में गिरफ्तारी समेत पुलिस की जबरदस्ती की कार्रवाई से पूरी सुरक्षा मांगी थी।

कोलकाता, 23 जुलाई (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में उनके खिलाफ दर्ज सभी आठ एफआईआर में गिरफ्तारी समेत पुलिस की जबरदस्ती की कार्रवाई से पूरी सुरक्षा मांगी थी।

यह मामला जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के आखिर में जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि पुलिस की जबरदस्ती की कार्रवाई के खिलाफ पूरी अंतरिम सुरक्षा देना मुमकिन नहीं है।

इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी। जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि अगर इस बीच पुलिस इन आठ एफआईआर में से किसी में भी उनके खिलाफ कोई जबरदस्ती की कार्रवाई करती है, तो मामला कोर्ट के ध्यान में लाया जा सकता है।

गुरुवार सुबह सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि पुलिस उनके क्लाइंट के खिलाफ एक के बाद एक एफआईआर दर्ज कर रही है और वह भी राज्य के अलग-अलग कोनों में अलग-अलग पुलिस थानों में। इसलिए, सिब्बल ने तर्क दिया कि उनके क्लाइंट को उनके खिलाफ दर्ज सभी आठ एफआईआर में पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे सुवेंदु अधिकारी को पहले कोर्ट ने पूरी सुरक्षा दी थी।

सिब्बल की दलील का एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि अंतरिम सुरक्षा केस-टू-केस आधार पर दी जा सकती है, न कि सभी एफआईआर में एक साथ।

अपने जवाबी तर्क में, सिब्बल ने कहा कि पहले भी ऐसा हुआ है जब पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को, जो उस समय पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता थे, कलकत्ता हाई कोर्ट ने सभी मामलों में पूरी सुरक्षा दी थी और उस समय कोर्ट ने अधिकारी के खिलाफ कोर्ट की पहले से इजाजत के बिना नई एफआईआर दर्ज करने पर भी रोक लगा दी थी।

इसके बाद, जस्टिस भट्टाचार्य ने सिब्बल से कहा कि वे इस मामले में सुवेंदु अधिकारी का उदाहरण न दें। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट सभी संबंधित पक्षों को सुने बिना मामले में कोई फैसला नहीं ले सकता और इसलिए इस समय सभी एफआईआर में पूरी सुरक्षा नहीं दे सकता।

इसके बाद, मैंने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 30 जुलाई तय की है।

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Created On :   23 July 2026 1:51 PM IST

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