जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने केसीसीआई के पूर्व प्रमुख की संपत्ति जब्त की

जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने केसीसीआई के पूर्व प्रमुख की संपत्ति जब्त की
जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) विंग ने बुधवार को बताया कि कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मुबीन अहमद शाह की संपत्ति जब्त कर ली है।

श्रीनगर, 1 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) विंग ने बुधवार को बताया कि कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मुबीन अहमद शाह की संपत्ति जब्त कर ली है।

सीआईके अधिकारियों ने बताया कि डॉ. मुबीन शाह की संपत्ति को 2020 में दर्ज एक मामले की चल रही जांच के तहत जब्त किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस जब्ती में श्रीनगर जिले के बुचवारा में स्थित 12 मरला जमीन शामिल है।

यह कार्रवाई सीआईके पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज एफआईआर के सिलसिले में जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद की गई।

काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर की एक टीम ने स्थानीय राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में जब्ती की प्रक्रिया पूरी की। अधिकारियों ने मौके पर ही जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी की।

डॉ. मुबीन शाह, जो एक जाने-माने उद्योगपति हैं और 2006 से 2008 के बीच कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख रहे थे। वे 2019 के आखिर से अपने परिवार के साथ मलेशिया में रह रहे हैं।

संपत्ति की जब्ती चल रही जांच का हिस्सा है और अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कानून के मुताबिक जारी रहेगी।

जब्ती की प्रक्रिया नायब तहसीलदार शाह मोहम्मद आसिफ की मौजूदगी में पूरी की गई।

हालांकि, अधिकारियों ने मामले के बारे में तुरंत ज्यादा जानकारी नहीं दी।

डॉ. मुबीन शाह को 2019 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में रिहा कर दिया गया था। उन्हें एक अलगाववादी और प्रभावशाली कश्मीरी व्यवसायी के तौर पर देखा जाता है, जिन्होंने कश्मीर में अलगाववादी मुहिम का समर्थन करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया है।

मुबीन शाह का परिवार घाटी का एक स्थापित कारोबारी परिवार रहा है। बताया जाता है कि वे अभी मलेशिया में कश्मीरी हस्तशिल्प का कारोबार कर रहे हैं। घाटी में उनके परिवार का ऑटोमोबाइल का एक बड़ा कारोबार था और वे जम्मू-कश्मीर में हिंदुस्तान मोटर्स की एकमात्र एजेंसी चलाते थे, जब देश की संरक्षणवादी औद्योगिक नीति के कारण विदेशी मॉडलों को भारतीय बाजार में आने की इजाजत नहीं थी।

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Created On :   1 July 2026 2:11 PM IST

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