खाने और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ रहा यूद्ध का असर, यूएन में भारत समेत कई देशों ने जताई महंगाई पर चिंता

खाने और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ रहा यूद्ध का असर, यूएन में भारत समेत कई देशों ने जताई महंगाई पर चिंता
भारत और कई विकासशील देशों ने संयुक्त राष्ट्र में कहा क‍ि युद्धों से होने वाला आर्थिक नुकसान सिर्फ लड़ाई वाले इलाकों तक सीमित नहीं रहता। इसकी वजह से उन देशों में भी भोजन और ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं और व्यापार प्रभावित हो रहा है, जिनका इन संघर्षों पर बहुत कम प्रभाव है।

संयुक्त राष्ट्र, 27 सितंबर (आईएएनएस)। भारत और कई विकासशील देशों ने संयुक्त राष्ट्र में कहा क‍ि युद्धों से होने वाला आर्थिक नुकसान सिर्फ लड़ाई वाले इलाकों तक सीमित नहीं रहता। इसकी वजह से उन देशों में भी भोजन और ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं और व्यापार प्रभावित हो रहा है, जिनका इन संघर्षों पर बहुत कम प्रभाव है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि लड़ाई से काफी दूर मौजूद देशों को भी खाने, ईंधन, खाद, फाइनेंस और व्यापार की सप्लाई में रुकावट की कीमत चुकानी पड़ रही है।

उन्होंने कहा, "जो देश इन हालात से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है।"

जयशंकर ने कहा कि शांति बनाए रखने में नाकामी से सुरक्षा कमजोर हो रही है, विकास की रफ्तार प्रभावित हो रही है और अब तक हुई प्रगति पर भी खतरा बढ़ रहा है। इसका असर खास तौर पर ग्लोबल साउथ के देशों पर ज्यादा पड़ रहा है।

भारत ने यूक्रेन युद्ध और खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष पर चिंता जताई। उसने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की। साथ ही भारत ने ऊर्जा और व्यापार की आवाजाही बिना रुकावट जारी रखने तथा जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की कई दिनों तक चली जनरल डिबेट में कैरेबियन, हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीका के कई नेताओं ने भी युद्धों के इसी आर्थिक असर को लेकर चिंता जताई।

डोमिनिकन रिपब्लिक के राष्ट्रपति लुइस अबिनादर ने कहा कि यूरोप और मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध भले ही 'हमारे समुद्री तटों से बहुत दूर' हों, लेकिन इनका सीधा असर उनके देश में भोजन और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि एक विकासशील द्वीपीय देश होने के नाते डोमिनिकन रिपब्लिक अच्छी तरह समझता है कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में लगने वाले आर्थिक झटके कितनी तेजी से देश की आर्थिक वृद्धि और आम परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

अबिनादर ने तनाव कम करने, समुद्री रास्तों पर आवाजाही की आजादी बनाए रखने और संघर्ष को और बढ़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक कोशिशों की अपील की।

कोमोरोस के राष्ट्रपति अजाली असौमानी ने कहा कि मध्य पूर्व के युद्ध और होर्मुज स्‍ट्रेट में आवाजाही ठप होने से पूरी दुनिया को झटका लगा है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष से कोमोरोस जैसे कमजोर और आयात पर निर्भर देशों की खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। उन्होंने कहा कि इन आर्थिक दबावों की वजह से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजीएस) को हासिल करना और मुश्किल होता जा रहा है।

पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने कहा कि युद्ध अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं और आर्थिक खुशहाली की संभावनाओं को कम कर रहे हैं। उन्होंने पड़ोसी देशों, व्यापारिक जहाजों और आम नागरिकों से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने की अपील की।

मोंटेनेग्रो ने कहा, "इससे पैदा हुए ऊर्जा और ईंधन संकट से हर किसी को नुकसान हो रहा है। हमें खुद को मिलकर नुकसान पहुंचाने के इस सिलसिले को खत्म करना होगा।"

उन्होंने युद्धों के आर्थिक असर को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाने और तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाली व्यवस्थाओं पर चर्चा करने की भी मांग की।

मालदीव के उपराष्ट्रपति हुसैन मोहम्मद लतीफ ने कहा कि आज असुरक्षा सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहती। उसका असर समुद्री रास्तों, सप्लाई चेन, वित्तीय बाजारों और डिजिटल नेटवर्क के जरिए दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचता है।

उन्होंने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाजों की आवाजाही में रुकावट की वजह से ईंधन की कीमतें बढ़ीं और खाने की सप्लाई तथा हवाई यात्रा पर भी असर पड़ा।

मालदीव की अर्थव्यवस्था काफी हद तक आयात और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर निर्भर है, इसलिए इसका असर टूरिज्म और सरकारी वित्तीय स्थिति पर भी पड़ता है।

लतीफ ने चेतावनी दी कि हिंद महासागर में बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा की वजह से छोटे देशों के पास मौजूद विकल्प सीमित नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के लिए खुला रहना चाहिए।

लातविया के राष्ट्रपति एडगर्स रिंकेविच ने इस मुद्दे को सिर्फ तुरंत होने वाले आर्थिक नुकसान से आगे बढ़ाते हुए कहा, "यूक्रेन में जो होता है, वह सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं रहता। मध्य पूर्व, लाल सागर और सूडान में जो होता है, उसका असर भी वहीं तक नहीं रुकता।"

कई नेताओं ने कहा कि युद्धों के आर्थिक नतीजे यह दिखाते हैं कि किसी संघर्ष को सिर्फ एक क्षेत्र की समस्या मानकर नहीं देखा जा सकता। परिवहन, ऊर्जा और बीमा की बढ़ती लागत सप्लाई चेन के जरिए आगे बढ़ती है और आखिरकार हजारों किलोमीटर दूर रहने वाले आम परिवारों की जेब तक उसका असर पहुंचता है।

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है और ऊर्जा, खाद तथा दूसरी जरूरी चीजों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रास्तों पर निर्भर है। इसलिए दुनिया में ईंधन और माल ढुलाई की कीमतों में बदलाव का असर भारत में परिवहन, खेती और रोजमर्रा की चीजों की लागत पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया के किसी दूर के हिस्से में होने वाला युद्ध भी भारतीय परिवारों के लिए सीधे आर्थिक चिंता का मुद्दा बन सकता है।

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Created On :   27 Sept 2026 11:06 AM IST

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