अभिनय की बारीकियां सीखने में सीनियर्स ने की मदद दिव्या दत्ता

अभिनय की बारीकियां सीखने में सीनियर्स ने की मदद दिव्या दत्ता
हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'लास्ट मैन इन टावर' को मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया के बीच अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने अभिनय के तकनीकी पहलुओं के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में अभिनय की तकनीकी बारीकियां सीखने में उनके सीनियर्स ने उनकी काफी मदद की थी।

मुंबई, 27 सितंबर (आईएएनएस)। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'लास्ट मैन इन टावर' को मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया के बीच अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने अभिनय के तकनीकी पहलुओं के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में अभिनय की तकनीकी बारीकियां सीखने में उनके सीनियर्स ने उनकी काफी मदद की थी।

फिल्म के प्रमोशन के दौरान दिव्या दत्ता ने अपने को-एक्टर मनोज बाजपेयी और निर्देशक बेन रेखी के साथ मुंबई में आईएएनएस से बातचीत की।

दिव्या दत्ता ने आईएएनएस से कहा, ''सबसे पहले, जहां तक मेरे लिए तकनीकी पहलुओं की बात है, अगर मुझे अपनी बुनियादी चीजें पता हैं, मैं अपना डायलॉग ठीक से बोल रही हूं और वह स्क्रीन पर सही तरीके से नजर आ रहा है, तो मेरे लिए इतना काफी है। एक समय ऐसा भी था, जब मुझे इन चीजों की जानकारी नहीं थी। मैं अपना सर्वश्रेष्ठ कर रही थी, लेकिन स्क्रीन पर सही तरीके से नजर नहीं आ रही थी। उस समय मेरे सीनियर्स ने मेरा हाथ थामा और मुझसे कहा, ‘सुनो, तुम अच्छा कर रही हो, लेकिन स्क्रीन पर सही तरीके से नजर नहीं आ रही हो।’ इस मामले में मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं।''

उन्होंने आगे कहा, ''समय के साथ आप ये चीजें सीखते हैं। वे यह भी कहते हैं कि पहले अपनी लाइनें अच्छे से तैयार कर लो, तकनीकी चीजों को समझ लो और उसके बाद बस उस पल में पूरी तरह शामिल हो जाओ। उस पल का जादू अपने आप होने दो। अगर मैं अपने को-एक्टर की आंखों में देख रही हूं, तो शायद हर टेक अलग होगा। हर टेक में जब मैं उनकी आंखों में देखूंगी तो उससे एक अलग भावना पैदा हो सकती है।''

दिव्या ने आगे कहा, ''वह भावना कभी ऊपर जा सकती है और कभी नीचे। कई बार यह आपको हैरान भी कर देती है। इसलिए आपको उसे स्वाभाविक रूप से होने देना चाहिए। अगर आप बहुत ज्यादा बंध जाते हैं और सोचते हैं कि 'नहीं, नहीं, यही सीमा है और मुझे इसी नोट पर परफॉर्म करना है', तो आपका अभिनय बहुत सीमित हो जाता है। आपको बस अपने अभिनय को स्वाभाविक रूप से बहने देना चाहिए।''

इस बीच, 'लास्ट मैन इन टावर' अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। फिल्म की कहानी तेजी से बदलते मुंबई की पृष्ठभूमि पर आधारित है।

फिल्म में मनोज बाजपेयी एक रिटायर्ड स्कूल टीचर और विधुर की भूमिका निभा रहे हैं, जो एक पुरानी अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहते हैं। जब एक अमीर डेवलपर वहां के निवासियों को इमारत बेचने के बदले बड़ी रकम की पेशकश करता है, ताकि उसकी जगह एक लग्जरी टावर बनाया जा सके, तो ज्यादातर लोग पैसे के लालच में इस प्रस्ताव के लिए तैयार हो जाते हैं।

हालांकि, मनोज बाजपेयी का किरदार वहां से जाने से इनकार कर देता है और इस तरह वह पुनर्विकास योजना के रास्ते में अकेली बड़ी बाधा बन जाता है।

फिल्म 'लास्ट मैन इन टावर' फिलहाल सिनेमाघरों में चल रही है।

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Created On :   27 Sept 2026 8:35 PM IST

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