ईडी ने 70 करोड़ रुपए की मेफेड्रोन ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया

ईडी ने 70 करोड़ रुपए की मेफेड्रोन ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया
जांच एजेंसी के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने 70 किलोग्राम मेफेड्रोन (एमडीएमए) से जुड़े ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े रैकेट के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

इंदौर, 23 जुलाई (आईएएनएस)। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने 70 किलोग्राम मेफेड्रोन (एमडीएमए) से जुड़े ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े रैकेट के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल और अक्षय अग्रवाल के तौर पर हुई है। इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के बाद उन्हें 21 जुलाई, 2026 को हिरासत में लिया गया था।

यह मामला नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 की विभिन्न धाराओं और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत दंडनीय अपराधों से संबंधित है।

ईडी के अनुसार, आरोपी और अन्य लोग कमर्शियल मात्रा में मेफेड्रोन रखने और उसकी तस्करी में शामिल थे।

जांच से पता चला कि आरोपियों ने नशीले पदार्थों की तस्करी से अपराध के जरिए काफी पैसा कमाया और उस कैश को कई पर्सनल और बिजनेस बैंक अकाउंट्स के जरिए इधर-उधर किया।

फाइनेंशियल जांच में आपराधिक कमाई को व्यवस्थित रूप से रखने (प्लेसमेंट), लेयरिंग और छिपाने के सबूत मिले।

जांच के दौरान, ईडी ने 17 जुलाई, 2026 को मध्य प्रदेश के इंदौर और मंदसौर में कई जगहों पर बड़े पैमाने पर तलाशी ली।

लगातार निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के बाद किए गए इन ऑपरेशन्स में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और आरोपियों की संपत्ति, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और बिजनेस से जुड़े सबूत बरामद और जब्त किए गए।

ईडी ने कहा कि जांच के दौरान दर्ज बयानों से यह भी पता चला कि आरोपी अपने नियमित बिजनेस के अलावा नशीले पदार्थों की सप्लाई और तस्करी में भी शामिल थे।

ईडी ने इसे इस इलाके में चल रहे नशीले पदार्थों के व्यापार और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर रोक लगाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी बताया है।

अधिकारियों ने कहा कि आरोपी ड्रग तस्करी से होने वाली कमाई को छिपाने के लिए सही बिजनेस का इस्तेमाल कर रहे थे।

सिंडिकेट के दूसरे सदस्यों की पहचान करने, और संपत्तियों का पता लगाने और ड्रग सप्लाई चेन की पूरी हद का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।

सेंट्रल जांच एजेंसी गिरफ्तार लोगों को कस्टडी रिमांड के लिए तय पीएमएलए कोर्ट में पेश कर सकती है।

यह मामला मध्य प्रदेश में ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच बढ़ते रिश्ते को दिखाता है, जिससे अधिकारियों को संगठित नारकोटिक नेटवर्क पर कार्रवाई तेज करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

ईडी ने लोगों से ऐसी जानकारी देने की अपील की है जो चल रही जांच में मदद कर सके।

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Created On :   24 July 2026 12:01 AM IST

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