कर्नाटक आईएसआईएस फंडिंग की जांच में ईडी ने डिजिटल सबूत जब्त किए
बेंगलुरु, 23 जुलाई (आईएएनएस)। एजेंसी ने गुरुवार को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईएसआईएस में भर्ती और टेरर फंडिंग मॉड्यूल से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में बेंगलुरु में आठ जगहों पर तलाशी ली।
ये तलाशी 21 जुलाई को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत ली गई थीं। ऑपरेशन के दौरान, ईडी ने आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस जब्त किए और एक्ट की धारा 17(1-ए) के तहत अपराध से हुई 7.50 लाख रुपए की कमाई को फ्रीज कर दिया।
एजेंसी के अनुसार, यह जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर दर्ज एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) से शुरू हुई है। यह एफआईआर बेंगलुरु में मौजूद इकरा वेलफेयर ट्रस्ट, गाइडेंस फॉर मैनकाइंड (जीएफएम) ट्रस्ट और कुछ लोगों से जुड़ी कथित आईएसआईएस भर्ती गतिविधियों के बारे में थी।
एनआईए ने यह मामला गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 17 (आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंड जुटाना), 18 (आतंकवाद के लिए साजिश और तैयारी) और 18B (आतंकवादी गतिविधियों के लिए लोगों की भर्ती) के तहत दर्ज किया था।
एजेंसी ने पहले इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था: इरफान नासिर (एक बिजनेसमैन); अहमद अब्दुल कादर (एक प्राइवेट बैंक में बिजनेस एनालिस्ट); मो. तौकीर महमूद (एक डेंटिस्ट और केआईएमएस के पूर्व छात्र); ज़ुहाब हमीद शकील मन्ना उर्फ जोहैब मन्ना (एक आईटी प्रोफेशनल); और मो. शिहाब (एक आईटी प्रोफेशनल, जो जांच के दौरान कथित तौर पर फरार था)।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों ने 'इकरा कैंप' (जिसे पर्सनैलिटी डेवलपमेंट वर्कशॉप बताया गया) और 'कुरान सर्कल' (एक साप्ताहिक स्टडी ग्रुप) जैसे प्रोग्राम के जरिए लोगों की पहचान की और उन्हें कट्टरपंथी बनाया। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने आईएसआईएस में शामिल होने और हथियारबंद गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए लोगों को तुर्की के रास्ते सीरिया भेजने के मकसद से लोगों, ट्रस्ट और अपनी बचत से फंड इकट्ठा किया और उसे आगे बढ़ाया।
चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने सीएए/एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ी भावनाओं का फायदा उठाकर सांप्रदायिक तनाव भड़काया और एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार किया।
ईडी ने कहा कि जांच से पता चला है कि आरोपी और 'इकरा वेलफेयर ट्रस्ट' व 'गाइडेंस फॉर मैनकाइंड ट्रस्ट' से जुड़े ट्रस्टियों ने फंड इकट्ठा किया था। आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल कमजोर लोगों को आईएसआईएस में भर्ती करने और इसके लिए मदद करने में किया गया।
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Created On :   24 July 2026 12:01 AM IST












