बंगाल चुनाव के बाद की हिंसा रोकने के लिए ईसी स्थिति पर नजर रखेगा

बंगाल  चुनाव के बाद की हिंसा रोकने के लिए ईसी स्थिति पर नजर रखेगा
चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया है।

कोलकाता, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया है।

इस संबंध में, सीईओ के दफ्तर ने गुरुवार को जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधीक्षकों के साथ एक वर्चुअल मीटिंग की। मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने अधिकारियों को यह संदेश दिया।

बुधवार को विधानसभा चुनावों के दूसरे और अंतिम चरण के खत्म होने के बाद, राज्य के अलग-अलग जिलों से छिटपुट राजनीतिक झड़पों की खबरें आई हैं।

इसे देखते हुए, मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर के एक सूत्र ने बताया कि आयोग ने पहले से ही जरूरी कदम उठाए हैं।

आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस ने मौजूदा विधानसभा चुनावों के पहले चरण से पहले एहतियाती तौर पर करीब दो हज़ार 'बदमाशों' को गिरफ्तार किया था। दूसरे चरण से पहले भी लगभग उतने ही 'बदमाशों' को गिरफ्तार किया गया था।

गिरफ्तार किए गए ये लोग पिछले चुनावों के दौरान कई इलाकों में डर का माहौल बनाते थे।

आयोग के इस कदम के नतीजे के तौर पर, वोटिंग काफी हद तक शांतिपूर्ण रही है। हालांकि, अगर वे जमानत पर बाहर आते हैं, तो फिर से अशांति फैलने का खतरा है।

इसलिए, 4 मई को वोटों की गिनती से पहले, चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए राज्य में हालात पर नजर रखने का फैसला किया गया।

यह ध्यान देने वाली बात है कि 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद, कोलकाता समेत राज्य के कई जिलों में चुनाव के बाद हिंसा के आरोप सामने आए थे।

कलकत्ता हाई कोर्ट में हत्या, बलात्कार और आगजनी समेत अलग-अलग अपराधों की करीब 1,979 शिकायतें दर्ज की गई थीं।

हाई कोर्ट के आदेश पर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 'चुनाव के बाद हुई हिंसा' की जांच करने के बाद एक रिपोर्ट तैयार की थी।

हाई कोर्ट ने इस मामले पर राज्य से जवाब मांगा था।

हत्या और बलात्कार जैसे कुछ मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच का आदेश भी दिया गया था।

चुनाव के बाद हुई हिंसा के कई मामले अभी भी अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं।

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Created On :   30 April 2026 11:28 PM IST

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