आरबीआई स्वैप विंडो के जल्दी बंद करने के फैसले के बावजूद एफसीएनआर (बी) में निवेश 80 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है रिपोर्ट

आरबीआई स्वैप विंडो के जल्दी बंद करने के फैसले के बावजूद एफसीएनआर (बी) में निवेश 80 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है रिपोर्ट
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक), यानी एफसीएनआर(बी) जमा योजना के लिए विशेष स्वैप विंडो को तय समय से पहले बंद करने के फैसले के बावजूद, इस योजना के तहत आने वाला विदेशी मुद्रा प्रवाह 80 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंच सकता है। यह अनुमान बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) सिक्योरिटीज की एक नई रिपोर्ट में जताया गया है।

नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक), यानी एफसीएनआर(बी) जमा योजना के लिए विशेष स्वैप विंडो को तय समय से पहले बंद करने के फैसले के बावजूद, इस योजना के तहत आने वाला विदेशी मुद्रा प्रवाह 80 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंच सकता है। यह अनुमान बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) सिक्योरिटीज की एक नई रिपोर्ट में जताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पहले एफसीएनआर(बी) जमा के जरिए लगभग 70 अरब डॉलर तक के निवेश का अनुमान लगाया गया था। हालांकि योजना शुरू होने के बाद अपेक्षा से कहीं अधिक मजबूत निवेश प्रवाह देखने को मिला है। इसी कारण बोफा ने अपना अनुमान बढ़ाते हुए कहा है कि कुल प्रवाह 80 अरब डॉलर से भी अधिक हो सकता है।

ब्रोकरेज फर्म ने कहा, "मजबूत प्रवाह को देखते हुए हमने अपने अनुमान को बढ़ाकर 80 अरब डॉलर से अधिक कर दिया है।" हालांकि उसका यह भी मानना है कि यदि आरबीआई यह सुविधा सितंबर के अंत तक जारी रखता, तो कुल प्रवाह का आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता था।

गौरतलब है कि आरबीआई ने एफसीएनआर(बी) जमा पर उपलब्ध शून्य-लागत हेजिंग सुविधा का उपयोग करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त कर दी है। यानी बैंकों को इस विशेष सुविधा का लाभ उठाने के लिए पहले की तुलना में कम समय मिलेगा।

इसके बावजूद, जमा जुटाने की रफ्तार काफी मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 8 जून से 13 अगस्त के बीच बैंकों ने एफसीएनआर(बी) जमा के माध्यम से 52.3 अरब डॉलर जुटाए हैं। यह दर्शाता है कि विदेशी मुद्रा जमा योजनाओं में अनिवासी भारतीयों और वैश्विक निवेशकों की रुचि मजबूत बनी हुई है।

एफसीएनआर(बी) जमा के अलावा अन्य विदेशी मुद्रा स्रोतों से भी उल्लेखनीय प्रवाह प्राप्त हुआ है। इसी अवधि के दौरान आरबीआई को बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) के लिए स्वैप सुविधाओं के जरिए 1.7 अरब डॉलर और अधिकृत ऋणदाताओं द्वारा विदेशी मुद्रा उधारी के माध्यम से 2.8 अरब डॉलर प्राप्त हुए हैं।

बोफा का मानना है कि यह विदेशी मुद्रा प्रवाह भारत के भुगतान संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह ऐसे समय में हो रहा है जब चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का चालू खाते का घाटा (सीएडी) बढ़कर 3.1 अरब डॉलर, यानी जीडीपी के लगभग 0.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, चालू खाते के घाटे में वृद्धि का मुख्य कारण माल व्यापार (मर्चेंडाइज ट्रेड) घाटे का बढ़ना रहा है। हालांकि सेवाओं के निर्यात और विदेशों से आने वाले प्रेषण (रेमिटेंस) ने इस दबाव को काफी हद तक कम किया।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि दूसरी तिमाही में भी चालू खाते का घाटा नियंत्रित स्तर पर बना रहेगा। यदि वस्तुओं के निर्यात में और सुधार होता है या प्रवासी भारतीयों से आने वाली धनराशि मजबूत बनी रहती है, तो घाटा अनुमान से भी कम रह सकता है।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   17 Aug 2026 12:05 PM IST

Tags

Next Story