इंसानियत और स्वास्थ्य सेवा का अनोखा उदाहरण बना अहमदाबाद का ‘मां वात्सल्य मिल्क बैंक’, 451 नवजातों को दिया जीवनदान

इंसानियत और स्वास्थ्य सेवा का अनोखा उदाहरण बना अहमदाबाद का ‘मां वात्सल्य मिल्क बैंक’, 451 नवजातों को दिया जीवनदान
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में एक ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन प्रोग्राम ने 2,042 माताओं द्वारा दान किए गए 434 लीटर ह्यूमन मिल्क को इकट्ठा करके 451 नवजात शिशुओं के जीवित रहने और ठीक होने में मदद की है।

अहमदाबाद, 9 मई (आईएएनएस)। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में एक ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन प्रोग्राम ने 2,042 माताओं द्वारा दान किए गए 434 लीटर ह्यूमन मिल्क को इकट्ठा करके 451 नवजात शिशुओं के जीवित रहने और ठीक होने में मदद की है।

अहमदाबाद में 1,200 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल में 'मां वात्सल्य मिल्क बैंक' 28 अगस्त, 2025 से काम कर रहा है। इसे उन समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार शिशुओं को पोषण देने के लिए बनाया गया है जिनकी माताएं उन्हें स्तनपान कराने में असमर्थ हैं।

इस पहल को अस्पताल की इंटेंसिव केयर यूनिट्स में काम करने वाली नवजात शिशु देखभाल टीमों का समर्थन मिला है।

मिल्क बैंक की प्रभारी डॉ. सुचेता मुंशी ने कहा कि नवजात शिशुओं के विकास और जीवित रहने के लिए ब्रेस्ट मिल्क बहुत जरूरी है, खासकर उन मामलों में जहां शिशु की हालत नाजुक होती है।

उन्होंने कहा कि नवजात शिशु के लिए मां का दूध अमृत के समान होता है। जब से यह सुविधा शुरू हुई है, 2,042 माताओं ने न केवल अपने बच्चों के लिए, बल्कि अन्य जरूरतमंद शिशुओं के लिए भी ब्रेस्ट मिल्क दान किया है। कुल 434 लीटर दूध इकट्ठा किया गया है, जिससे नवजात शिशुओं को फायदा हुआ है।

अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि यह प्रोग्राम नवजात शिशु इंटेंसिव केयर सपोर्ट का एक अहम हिस्सा बन गया है, खासकर उन शिशुओं के लिए जिनका जन्म के समय वजन कम था या जो समय से पहले पैदा हुए थे और जिन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत थी।

अस्पताल ने इस पहल के असर को दिखाने के लिए कई मामलों का जिक्र किया है।

मंजुलाबेन के नवजात शिशु को खून में गंभीर इन्फेक्शन और आंतों में रुकावट की समस्या होने के बाद सर्जरी करवानी पड़ी थी और वह 32 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहा। इस दौरान उन्होंने 24 लीटर ब्रेस्ट मिल्क डोनेट किया।

कृष्णाबेन के समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चे को खास देखभाल की जरूरत थी और 40 दिनों के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। इस दौरान उन्होंने 24 लीटर दूध डोनेट किया।

पुनीताबेन ने समय से पहले और नाज़ुक हालत में जन्मे जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। उन्‍होंने पहले 40 दिनों के अंदर 13 लीटर ब्रेस्ट मिल्क डोनेट किया, साथ ही अपने बच्चों की भी देखभाल की, बाद में दोनों बच्चे ठीक हो गए।

एक और मामले में, पूजा पटेल के बच्चे का जन्म 815 ग्राम वजन के साथ हुआ था। उसे इंटेंसिव नियोनेटल केयर की जरूरत थी, जिसमें सरफेक्टेंट थेरेपी और नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में 12 दिनों तक सीपीएपी सपोर्ट शामिल था।

उन्होंने हर दिन 10 से 12 घंटे 'कंगारू मदर केयर' देने के साथ-साथ डोनेशन के लिए दूध निकालना भी जारी रखा। 44वें दिन बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया गया, तब उसका वजन 1.25 किलोग्राम था।

सिविल सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि यह पहल मेडिकल जरूरत और सामाजिक योगदान, दोनों को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि यह सेवा न केवल हेल्थकेयर सपोर्ट है, बल्कि इंसानियत का एक जीता-जागता उदाहरण भी है। सरकार के प्रयासों और समाज की भागीदारी के कारण सैकड़ों बच्चे एक स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।

अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि ब्रेस्ट मिल्क, नवजात शिशुओं की इम्यूनिटी को मजबूत करने और उनके शारीरिक व न्यूरोलॉजिकल विकास में अहम भूमिका निभाता है, खासकर उन बच्चों के मामले में जो समय से पहले जन्मे हों, जिनका वजन कम हो और जिन्हें खास देखभाल की जरूरत हो।

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Created On :   9 May 2026 11:23 PM IST

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