गुजरात अंबाजी मंदिर के मोहनथाल प्रसाद को जीआई टैग मिला, परंपरागत पहचान को मिला संरक्षण
अंबाजी, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात में अंबाजी मंदिर के पारंपरिक 'मोहनथाल' प्रसाद को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है। इससे इसके नाम को कानूनी संरक्षण मिलेगा और इसकी पारंपरिक पहचान तथा पारंपरिक विधि से तैयार किए जाने की विरासत को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
नवरात्रि के पहले दिन अंबाजी के चाचर चौक पर आयोजित एक समारोह में श्री अरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट को आधिकारिक सर्टिफिकेट सौंपा गया। मंदिर ट्रस्ट की अर्जी और जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद 1 अक्टूबर को यह सर्टिफिकेट जारी किया गया था।
इस समारोह की अध्यक्षता पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के कंट्रोलर जनरल और ज्योग्राफिकल इंडिकेशन्स के रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. उन्नत पंडित ने की। इस मौके पर बनासकांठा के जिला कलेक्टर मिहिर पटेल और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
कार्यक्रम में पंडित ने पारंपरिक उत्पादों की असली पहचान और गुणवत्ता को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "जीआई टैग से यह पक्का करने में मदद मिलेगी कि अंबाजी आने वाले भक्तों को असली मोहनथाल प्रसाद मिले।"
उन्होंने अहमदाबाद के एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई) की भूमिका पर भी जोर दिया, जिसने जीआई-टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देने और बेचने के लिए एक खास जीआई स्टोर शुरू किया है।
इस स्टोर में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए उत्पाद रखे गए हैं, जिससे उनकी पारंपरिक पहचान को बनाए रखने और उनकी बिक्री बढ़ाने में मदद मिलती है।
पंडित ने कहा कि इस सम्मान से न सिर्फ अंबाजी के मोहनथाल की खास पहचान को मान्यता मिली है, बल्कि मां जगदंबा में लाखों भक्तों की आस्था और इस इलाके की आध्यात्मिक विरासत का भी सम्मान हुआ है।
उन्होंने कहा, "जीआई टैग इस नाम के अनधिकृत इस्तेमाल और नकल के खिलाफ कानूनी सुरक्षा देगा। साथ ही प्रसाद को पारंपरिक तरीके से बनाने की प्रक्रिया को बनाए रखने में भी मदद करेगा।"
इस मान्यता के साथ अंबाजी का मोहनथाल उन मशहूर भारतीय धार्मिक प्रसादों की सूची में शामिल हो गया है जिन्हें जीआई टैग मिला है, जैसे तिरुपति लड्डू और पलानी पंचामृतम।
अंबाजी मंदिर के एडमिनिस्ट्रेटर और एडिशनल कलेक्टर कौशिक मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने जीआई टैग के महत्व और इस मान्यता को हासिल करने के लिए मंदिर ट्रस्ट की ओर से की गई कोशिशों के बारे में बताया।
इस समारोह में कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) की गुजरात इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी टास्क फोर्स के अधिकारी, सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधि, मंदिर ट्रस्ट के सदस्य, ट्रस्ट के अधिकारी और कर्मचारी, और श्रद्धालु शामिल हुए।
जीआई पहचान अंबाजी के पारंपरिक प्रसाद को एक खास भौगोलिक पहचान देती है और इसके नाम को अनधिकृत इस्तेमाल से बचाने के लिए एक ढांचा प्रदान करती है, साथ ही मंदिर और उसकी स्थापित परंपराओं के साथ इसके जुड़ाव को भी मजबूत करती है।
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Created On :   11 Oct 2026 11:11 PM IST











