सब्सिडी विवाद पर राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी बोले, कुछ नहीं छिपा रहे, सभी दस्तावेज पेश करने को तैयार
नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने शनिवार को उन आरोपों का बचाव किया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने उस मंत्रालय की एक सरकारी योजना के तहत अपने खीरे की खेती के प्रोजेक्ट के लिए 99.03 लाख रुपए की सब्सिडी ली थी, जिसमें वे खुद काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया तय गाइडलाइंस के अनुसार की गई थी और कहा कि जब भी जरूरत होगी, वे सभी जरूरी दस्तावेज पेश करने के लिए तैयार हैं।
यह विवाद 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक जांच के बाद शुरू हुआ है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चौधरी को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की एक योजना के तहत लगभग तीन महीने पहले 99 लाख रुपए की सब्सिडी मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (एनएचबी) ने मंजूरी दी थी, जिसके चौधरी पदेन उपाध्यक्ष हैं।
भागीरथ चौधरी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "यह सच है। मैं एक किसान हूं और खेती-बाड़ी का काम करता हूं। मैंने एक पॉलीहाउस प्रोजेक्ट तैयार किया है और बारिश का पानी जमा करने के लिए लगभग दो करोड़ लीटर की क्षमता वाले चार फार्म पॉन्ड (खेत के तालाब) बनाए हैं। इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई और अपनी फसलों के लिए किया जाता है।"
उन्होंने कहा, "मैंने तय नियमों के अनुसार बैंक से भी लोन लिया है। मैं कुछ भी नहीं छिपा रहा हूं। मैंने साइट पर एक बोर्ड भी लगाया है, जिस पर लिखा है कि मैंने सब्सिडी ली है और यह प्रोजेक्ट किसानों को खेती के आधुनिक तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से शुरू किया गया है।"
उन्होंने कहा, "सब कुछ गाइडलाइंस के तहत किया गया है। मैंने कुछ भी नहीं छिपाया है। अगर किसान खेती के नए तरीके नहीं अपनाएंगे तो वे कैसे तरक्की करेंगे? मैं दूसरे किसानों को प्रेरित करने के लिए ऐसा कर रहा हूं।"
इस प्रक्रिया के बारे में बताते हुए चौधरी ने कहा, "मैंने सबसे पहले पॉलीहाउस लगाया और लगभग छह महीने बाद सही बैंकिंग प्रक्रिया के जरिए मुझे सब्सिडी मिली। मैं निश्चित रूप से सभी तथ्य और दस्तावेज जनता के सामने पेश कर सकता हूं। मैंने एक बोर्ड लगाया है, जिस पर लोन की रकम और मिली सब्सिडी का जिक्र है।"
इस बीच, चुनिंदा सब्जियों और फूलों की 'कमर्शियल फार्मिंग' यानी मुनाफे के लिए बड़े पैमाने पर खेती को बढ़ावा देने वाली योजना 'मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर' के तहत आती है। इसे 2014-15 में शुरू किया गया था और इसका संचालन 'नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड' (एनएचबी) करता है, जो चौधरी के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली एक स्वायत्त संस्था है।
इस पहल के तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और गुलाब, एंथुरियम व ऑर्किड समेत आठ तरह के फूलों की खेती के लिए प्रोजेक्ट की लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है, जिसकी सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपए तय की गई है।
चौधरी का 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट एनएचबी द्वारा 2025 में 'बागवानी फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद के प्रबंधन के जरिए कमर्शियल बागवानी का विकास' स्कीम के तहत मंजूर किए गए 467 प्रोजेक्ट्स में से एक है।
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :   27 Jun 2026 7:33 PM IST












