साइबर सुरक्षा परीक्षण के लिए एंथ्रोपिक के एआई मॉडल तक पहुंच प्राप्त करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा भारत सरकारी अधिकारी

साइबर सुरक्षा परीक्षण के लिए एंथ्रोपिक के एआई मॉडल तक पहुंच प्राप्त करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा भारत सरकारी अधिकारी
भारत अपनी महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना (क्रिटिकल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर) की साइबर सुरक्षा परीक्षण को और मजबूत बनाने के लिए एंथ्रोपिक के अत्याधुनिक एआई मॉडल 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुंच हासिल करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। भारत अपनी महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना (क्रिटिकल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर) की साइबर सुरक्षा परीक्षण को और मजबूत बनाने के लिए एंथ्रोपिक के अत्याधुनिक एआई मॉडल 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुंच हासिल करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव एस. कृष्णन ने कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) साइबर सिक्योरिटी समिट में कहा कि अमेरिका के साथ इस विषय पर बातचीत जारी है। उन्होंने बताया कि यदि भारत को इस उन्नत एआई मॉडल तक पहुंच मिलती है, तो वह अपनी डिजिटल प्रणालियों का परीक्षण अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमताओं के आधार पर कर सकेगा।

उन्होंने कहा, "हम 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुंच पाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। इससे हमें एंथ्रोपिक के एआई सिस्टम की मदद से अपनी डिजिटल प्रणालियों का गहन परीक्षण करने में मदद मिलेगी।"

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत चर्चाओं के निष्कर्ष का इंतजार नहीं कर रहा है और उसने पहले से ही उपलब्ध एआई मॉडलों का उपयोग करके अपने महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम की साइबर सुरक्षा जांच शुरू कर दी है।

उनके अनुसार, करीब 60 से 70 प्रतिशत साइबर सुरक्षा परीक्षण मौजूदा एआई मॉडलों के जरिए ही किया जा सकता है, जबकि 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुंच मिलने से परीक्षण की क्षमता और अधिक मजबूत हो जाएगी।

अप्रैल 2026 में अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाना है।

इस प्रोजेक्ट में अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस), एप्पल, ब्रॉडकॉम, सिस्को, क्राउडस्ट्राइक, गूगल, जेपी मॉर्गन चेस, लिनक्स फाउंडेशन, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और पालो अल्टो नेटवर्क्स जैसी वैश्विक टेक कंपनियां शामिल हैं।

इस बीच, दुनिया भर में एआई की बढ़ती क्षमताओं के कारण साइबर अपराधियों के लिए भी नए तरह के हैकिंग टूल तैयार करना आसान होता जा रहा है। इसी खतरे को देखते हुए एप्पल भी अपने सॉफ्टवेयर अपडेट पहले से अधिक तेजी से जारी कर रही है, ताकि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बेहतर बनाई जा सके।

रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी अब उन सुरक्षा अपडेट्स को भी पहले जारी कर रही है, जिन्हें पहले आईओएस के बड़े अपडेट के साथ रिलीज किया जाता था।

एस. कृष्णन ने कहा कि जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अधिक शक्तिशाली होता जा रहा है, वैसे-वैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में कमजोरियों की पहचान करना भी आसान हो गया है। ऐसे में भारत अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप मजबूत बनाने पर तेजी से काम कर रहा है।

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Created On :   3 July 2026 2:32 PM IST

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