'दक्षिण-पूर्वी यूरोप को विकास का नया केंद्र मानता है भारत', राष्ट्रपति मुर्मु ने मैसेडोनिया की संसद को किया संबोधित
स्कोप्जे, 21 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को उत्तर मैसेडोनिया की संसद को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत दक्षिण-पूर्वी यूरोप को अब दुनिया के किनारे का इलाका नहीं मानता, बल्कि उसे विकास और नई सोच (इनोवेशन) का एक उभरता हुआ केंद्र मानता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, "हम आज मानव इतिहास के एक बेहद अहम दौर में मिल रहे हैं। दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक ताकत का संतुलन बदल रहा है। इस नए दौर में भारत दक्षिण-पूर्वी यूरोप को किसी हाशिए पर पड़े क्षेत्र की तरह नहीं, बल्कि विकास और नई संभावनाओं से भरे एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखता है।"
उन्होंने कहा, "भारत, उत्तर मैसेडोनिया को कोई दूर का देश नहीं मानता, बल्कि एक ऐसे अहम साझेदार के रूप में देखता है जो स्थिर, बहुध्रुवीय और समृद्ध वैश्विक भविष्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।"
राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर मैसेडोनिया इस बदलाव के केंद्र में है। उन्होंने इसे भूमध्यसागर और मध्य यूरोप को जोड़ने वाला, साथ ही पूर्व और पश्चिम के बीच एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बताया।
उन्होंने कहा, "हमारे रिश्तों की शुरुआत दो हजार साल से भी पहले हुई थी, जब इस क्षेत्र के व्यापारी भारत आए थे। उस समय व्यापार, दर्शन और कला के रास्तों ने हमारी प्राचीन सभ्यताओं को एक-दूसरे से जोड़ा था। आज भी यह ऐतिहासिक रिश्ता सांस्कृतिक मेल-जोल के रूप में जीवित है। आपकी पूर्वी परंपराएं भारत की विविधता और सभी को साथ लेकर चलने वाली सोच से गहराई से जुड़ी हुई हैं।"
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत व्यापार और निवेश के जरिए दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत के प्राचीन विचार 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी 'पूरी दुनिया एक परिवार है' का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, "हम द्विपक्षीय स्तर पर और पूरे क्षेत्र के साथ अपने सहयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसमें व्यापार और निवेश के नए अवसर भी शामिल हैं। कोई भी देश अकेले आगे नहीं बढ़ सकता। भारत की प्राचीन सभ्यता 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका मतलब है कि पूरी दुनिया एक परिवार है।"
उन्होंने कहा, "आज जब दुनिया संघर्ष और आर्थिक बंटवारे का सामना कर रही है, तब यह विचार हमें दीवारें खड़ी करने के बजाय रिश्तों के पुल बनाने की प्रेरणा देता है। हमें सिर्फ आज के बारे में नहीं, बल्कि आने वाले समय के बारे में भी सोचना चाहिए। आइए, अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत आर्थिक साझेदारी में बदलें। इतिहास से जुड़े और भविष्य की सोच रखने वाले दो लोकतांत्रिक देशों के रूप में हम मिलकर अपने लोगों के लिए शांति और समृद्धि का नया रास्ता तैयार करें।"
संबोधन में राष्ट्रपति ने बताया कि बुधवार को वह स्कोप्जे की सबसे प्रसिद्ध बेटी मदर टेरेसा को श्रद्धांजलि देंगी। उन्होंने कहा कि मदर टेरेसा ने भारत को अपना घर बनाया था। उन्होंने बताया कि वह महात्मा गांधी की एक प्रतिमा (बस्ट) भेंट करेंगी, जिनके शांति और अहिंसा के विचार आज भी पूरी दुनिया को जोड़ने का काम करते हैं।
इस दौरान उत्तर मैसेडोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टिजन मिकोस्की ने स्कोप्जे में राष्ट्रपति मुर्मु के सम्मान में दोपहर के भोजन का आयोजन किया। इस मौके पर उत्तर मैसेडोनिया के कई मंत्री और सांसद भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं की बातचीत के दौरान उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी सम्मान पर आधारित दोनों देशों के करीबी रिश्तों को आगे और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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Created On :   21 July 2026 8:46 PM IST











