शांति, सहयोग और जवाबदेही की नीति से दुनिया में बढ़ा भारत का भरोसा रिपोर्ट
नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। वैश्विक मंच पर भारत का उदय न केवल उसकी आर्थिक वृद्धि और भू-राजनीतिक महत्व के कारण हुआ है, बल्कि इसलिए भी हुआ है कि पिछले कुछ वर्षों में उसने एक ऐसे देश के रूप में अपनी विश्वसनीयता स्थापित की है, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करता है। द्विपक्षीय समझौतों का पालन करता है और वैश्विक शासन में रचनात्मक योगदान देता है।
गल्फ न्यूज के लेख में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के शांति-रक्षा अभियानों में भारत की भागीदारी, बहुपक्षीय संस्थाओं के नियमों का पालन, जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं, विकास साझेदारियों या मानवीय सहायता के जरिए यह बात साबित हुई है।
कई चुनौतियों के बावजूद भारत ने लगातार क्षेत्रीय स्थिरता, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग में निवेश किया है। इसमें कहा गया है कि विकासशील देशों को क्रेडिट लाइन देने से लेकर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने तक भारत ने कई अवसरों पर संकट के समय सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले देशों में अपनी भूमिका निभाई है।
उदाहरण के लिए कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने देश के भीतर की बड़ी चुनौती का सामना करते हुए भी दर्जनों देशों को दवाएं और टीके उपलब्ध कराए। 'वैक्सीन मैत्री' जैसी पहलों के जरिए भारत ने एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत क्षेत्र के देशों को लाखों वैक्सीन डोज उपलब्ध कराईं।
इसी तरह, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान मदद कर रहा है। मालदीव और मॉरिशस को मानवीय सहायता दे रहा है। संघर्ष वाले इलाकों से नागरिकों को सुरक्षित निकाल रहा है या चक्रवात और भूकंप के बाद राहत कार्यों में मदद कर रहा है।
हालांकि, लेख में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि विश्वसनीयता को कभी भी निष्क्रियता नहीं समझना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समझौते आपसी दायित्वों पर आधारित होते हैं। किसी भी जिम्मेदार देश से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह ऐसी व्यवस्थाओं को अनिश्चित काल तक बनाए रखेगा, जिन्हें लगातार दुश्मनी, हिंसा या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों से कमजोर किया जा रहा हो।
इसमें कहा गया है कि "इसी व्यापक संदर्भ में सिंधु जल संधि सहित कुछ द्विपक्षीय समझौतों को निलंबित करने से जुड़ी चर्चाओं को समझा जाना चाहिए। कई युद्धों, सैन्य टकरावों और गंभीर राजनयिक तनाव के दौर के बावजूद भारत ने दशकों तक इस संधि का पालन किया। पानी के बंटवारे से जुड़े बहुत कम अंतरराष्ट्रीय समझौते ही इतने लंबे समय और मुश्किल हालात में टिक पाए हैं।"
लगातार सीमा-पार आतंकवाद, जिसमें नागरिकों पर बार-बार हमले और सुरक्षा के लिए लगातार खतरे शामिल हैं, उन आधारों को निश्चित रूप से प्रभावित करते हैं जिन पर सहयोग टिका होता है।
भारत का रुख लगातार एक जैसा रहा है। वह शांति चाहता है, लेकिन जवाबदेही पर जोर देता है। वह बातचीत का समर्थन करता है। अहिंसा के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता की उम्मीद करता है। लेख में कहा गया है कि वह समझौतों का सम्मान करता है, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार बने खतरों को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
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Created On :   26 Jun 2026 11:59 PM IST












