जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा एलजी ने सिक्योरिटी फोर्स में बेहतर तालमेल पर दिया जोर

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा एलजी ने सिक्योरिटी फोर्स में बेहतर तालमेल पर दिया जोर
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद को खत्म करने के लिए पूरी तरह तालमेल और केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के मकसद से विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग पर जोर दिया।

श्रीनगर, 1 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद को खत्म करने के लिए पूरी तरह तालमेल और केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के मकसद से विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग पर जोर दिया।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को श्रीनगर के लोक भवन में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति का जायजा लेने के लिए एक हाई-लेवल सिक्योरिटी रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता की।

इस हाई-लेवल मीटिंग में मुख्य रूप से मौजूदा सुरक्षा हालात, सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल तैयारी और इंटेलिजेंस शेयरिंग को मजबूत करने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।

एलजी ने सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस (जे), खुफिया विभाग और नागरिक प्रशासन जैसी विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करने के उपायों पर जोर दिया।

कई सुरक्षा बलों और प्रशासनिक विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मीटिंग में हिस्सा लिया और एलजी को आंतरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल और आतंकवाद से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना करने के लिए किए जा रहे सक्रिय उपायों के बारे में जानकारी दी।

मनोज सिन्हा जम्मू-कश्मीर में शांति और अमन-चैन बनाए रखने के लिए विभिन्न सुरक्षा बलों और इंटेलिजेंस एजेंसियों की समय-समय पर रिव्यू मीटिंग कर रहे हैं और आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर जोर दे रहे हैं।

सुरक्षा बल केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद के सपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह खत्म करने के मकसद से लगातार काम कर रहे हैं। इस रणनीति में आतंकवादियों, उनके ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और समर्थकों के खिलाफ ऑपरेशन शामिल हैं।

जहां ये ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल चलाते हैं, वहीं भारतीय सेना और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ), जो लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) और इंटरनेशनल बॉर्डर की सुरक्षा करते हैं, सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ, तस्करी और टेरर हैंडलर्स की ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए तैनात हैं।

सीमा पार बैठे टेरर हैंडलर्स जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बनाए रखने के लिए हथियार, गोला-बारूद, कैश और ड्रग्स गिराने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं। ये सामान आमतौर पर ओजीडब्ल्यू उठाते हैं और बाद में आतंकवादियों को सौंप देते हैं।

भारतीय सेना और बीएसएफ ड्रोन के खतरे को रोकने के लिए ह्यूमन इंटेलिजेंस के अलावा हाई-टेक एंटी-ड्रॉप टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

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Created On :   1 Sept 2026 7:06 PM IST

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