महाराष्ट्र, यूपी मॉडल पर खाद की लिंकिंग पर रोक लगाएगा कृषि मंत्री दत्तात्रेय
मुंबई, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने मंगलवार को घोषणा की कि राज्य सरकार 'उर्वरक लिंकिंग' की प्रथा को रोकने के लिए एक नीति लागू करेगी, जो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए निर्णय पर आधारित होगी।
यह घोषणा आज हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान की गई, जिसका उद्देश्य महाराष्ट्र उर्वरक, कीटनाशक और बीज डीलर एसोसिएशन की शिकायतों का समाधान करना था।
मंत्री के सकारात्मक आश्वासनों के बाद, 27 अप्रैल को शुरू हुई राज्यव्यापी हड़ताल को वापस लेने के संबंध में चल रही चर्चाओं का रुख अब अनुकूल हो गया है।
मंत्री भरने ने कई महत्वपूर्ण उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिनका उद्देश्य कृषि आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करना और स्थानीय खुदरा विक्रेताओं पर पड़ने वाले बोझ को कम करना है।
उन्होंने कहा कि 'जबरन लिंकिंग' पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर, जिन कंपनियों को सब्सिडी वाले उर्वरक बेचने का अधिकार प्राप्त है, उन्हें अब खुदरा विक्रेताओं पर यह शर्त थोपने से रोका जाएगा कि वे आपूर्ति प्राप्त करने के लिए गैर-सब्सिडी वाले उर्वरक या अन्य कृषि-सामग्री भी खरीदें।
उन्होंने आगे कहा कि खुदरा विक्रेताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि मूल, सीलबंद पैकेजिंग में बेचे गए बीज, उर्वरक या कीटनाशक परीक्षण के दौरान घटिया पाए जाते हैं, तो राज्य सरकार 'हरियाणा मॉडल' का अध्ययन करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खुदरा विक्रेताओं को आपराधिक रूप से उत्तरदायी न ठहराया जाए, बल्कि इसके बजाय निर्माताओं पर कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
उन्होंने अवैध बीजों के खिलाफ कार्रवाई का भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों से आने वाले अप्रमाणित एचटीबीटी कपास के बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा, और राज्य का गृह विभाग इस नियम के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बलों के साथ समन्वय स्थापित करेगा।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र उर्वरक, कीटनाशक और बीज डीलर एसोसिएशन के साथ-साथ विभिन्न निर्माता कंपनियों के साथ भी चर्चा की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाप्त हो चुकी कीटनाशक दवाएं खुदरा विक्रेताओं के पास पड़ी रहने के बजाय आपूर्तिकर्ताओं को वापस भेज दी जाएं।
मंत्री ने इस क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का 'साथी' पोर्टल बीजों के उत्पादन से लेकर बिक्री तक की निगरानी करने के लिए एक बेहतरीन प्रणाली है, और सभी उत्पादकों तथा आपूर्तिकर्ताओं को इसका प्रभावी ढंग से उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि 'इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल' (ईपीओएस) प्रणालियों के संबंध में, यदि किसी उपयोगकर्ता को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, मंत्री ने कहा कि खुदरा विक्रेताओं के लिए अनिवार्य 15-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि को, यदि आवश्यक हुआ, तो बढ़ाया जा सकता है, ताकि व्यावसायिक मालिकों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
मंत्री भरने ने बताया कि वे केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा से मिलने की योजना बना रहे हैं, ताकि केंद्रीय स्तर पर कृषि सामग्री से संबंधित लंबित मुद्दों का समाधान किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इन आश्वासनों के साथ, सरकार और डीलरों के बीच बना गतिरोध जल्द ही समाप्त होने की उम्मीद है, जिससे आगामी कृषि मौसम के लिए कृषि-सामग्री की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
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Created On :   28 April 2026 10:51 PM IST











