मेघालय की रोजगार नीतियां दे रही हैं परिणाम सीएम कॉनराड के संगमा

मेघालय की रोजगार नीतियां दे रही हैं परिणाम सीएम कॉनराड के संगमा
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने गुरुवार को विपक्ष के इस दावे को खारिज कर दिया कि राज्य की रोजगार नीतियां विफल रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न पहलों से युवाओं के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा हो रहे हैं।

शिलांग, 26 फरवरी (आईएएनएस)। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने गुरुवार को विपक्ष के इस दावे को खारिज कर दिया कि राज्य की रोजगार नीतियां विफल रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न पहलों से युवाओं के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा हो रहे हैं।

विधानसभा में चर्चा के दौरान मिजानुर काजी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की रोजगार रणनीति को असफल करार देना भ्रामक होगा। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी के आंकड़े अलग-अलग सर्वेक्षणों में भिन्न हैं और इन्हें संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए संगमा ने कहा कि पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार 2022-23 में मेघालय की बेरोजगारी दर 6.0 प्रतिशत और 2023-24 में 6.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के अनुमान में यह दर 3.1 प्रतिशत बताई गई है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न योजनाओं और हस्तक्षेपों के माध्यम से हाल के वर्षों में लगभग 3.66 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेघालय की युवा जनसांख्यिकीय संरचना एक विशेष चुनौती पेश करती है, क्योंकि राज्य की लगभग 50 प्रतिशत आबादी 20 वर्ष से कम आयु की है।

उन्होंने सदन से कहा, “रोजगार सृजन एक सतत प्रक्रिया है। हो सकता है कि हम अपने सभी उद्देश्यों को अभी पूरी तरह हासिल नहीं कर पाए हों, लेकिन हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि फोकस योजना के तहत 22,500 उत्पादक समूहों को 140 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे लगभग 2.1 लाख लोग लाभान्वित हुए हैं, जबकि फोकस+ पहल से अतिरिक्त 1.5 लाख लाभार्थियों तक पहुंच बनाई गई है।

उन्होंने बताया कि सीएम-एलीवेट कार्यक्रम को भी जोरदार प्रतिक्रिया मिली है और 20 दिनों के भीतर 22,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिसके चलते सरकार को अस्थायी रूप से पोर्टल बंद करना पड़ा।

बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के पदों के लिए खासी और गारो भाषा में अनिवार्य दक्षता को लेकर उठी चिंताओं का भी जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शर्त केवल बुनियादी संवाद कौशल तक सीमित है, न कि शैक्षणिक स्तर की दक्षता तक। उन्होंने कहा कि प्रभावी सेवा वितरण के लिए भाषा की जानकारी आवश्यक है।

संगमा ने यह भी घोषणा की कि सरकार ने प्राथमिक स्कूल स्तर पर खासी और गारो भाषा की शिक्षा शुरू करने का निर्णय लिया है और इसके लिए पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं।

प्रशासनिक सुधारों पर उन्होंने कहा कि रोजगार कार्यालयों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है और सीएम-कनेक्ट मंच के माध्यम से शिकायत निवारण तथा सरकारी योजनाओं की निगरानी को मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं सदन को आश्वस्त करता हूं कि आने वाले दिनों में इन कार्यक्रमों का प्रभाव और अधिक दिखाई देगा।”

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Created On :   26 Feb 2026 9:00 PM IST

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