दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान पूर्वोत्तर में अधिकतर शुष्क मौसम रहने की संभावना आईएमडी
गुवाहाटी/अगरतला, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुर्गा पूजा मनाने वालों के लिए खुशखबरी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में षष्ठी (बोधन) से विजया दशमी (21 अक्टूबर) तक उत्सव के दौरान मौसम शुष्क और बारिश रहित रहने की संभावना है।
आईएमडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आने वाले दिनों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के आठ राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) में शुष्क मौसम रहने की प्रबल संभावना है।
अधिकारी ने बताया कि अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान इसी अवधि में सामान्य के आसपास रहने का अनुमान है।
हालांकि, अधिकारी ने चेतावनी दी कि क्षेत्र में एक या दो स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।
पांच दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव शुक्रवार से शुरू हो गया है। लोग बड़े धूमधाम और उमंग के साथ रंगारंग सजावट और भव्य रूप से सजे पंडालों में इस अवसर को मना रहे हैं।
मौसम के शुष्क रहने के पूर्वानुमान से क्षेत्र भर में पूजा पंडालों में आने वाले और धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
इस बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 अक्टूबर तक आठ राज्यों वाले पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र से वापस लौट चुका है।
आईएमडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि पिछले वर्ष (2025) दक्षिण-पश्चिम मानसून 14 अक्टूबर को पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र से वापस लौट गया था।
अधिकारी ने कहा कि हालांकि नवंबर के उत्तरार्ध में शीत ऋतु का प्रभाव महसूस होने की संभावना है, लेकिन अब से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून 7 जून को पूर्वोत्तर क्षेत्र के बड़े हिस्से में प्रवेश कर गया, जो इसकी सामान्य शुरुआत की तारीख से दो दिन बाद था।
गुवाहाटी और अगरतला स्थित मौसम विज्ञान केंद्रों के सूचना एवं चिकित्सा विभाग (आईएमडी) के अधिकारियों ने बताया कि मानसून ने 10 जून तक पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे चार महीने के वर्षा ऋतु की शुरुआत हुई।
आईएमडी अधिकारी ने बताया कि जून से सितंबर तक चलने वाली चार महीने की मानसून अवधि के दौरान इस क्षेत्र में औसत वर्षा में 26 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
यह वर्षा की कमी तब हुई जब मानसून ने 10 जून तक पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया था।
15 अक्टूबर तक पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के साथ ही इस क्षेत्र में इस वर्ष का मानसून ऋतु समाप्त हो गया है, जिससे आने वाले हफ्तों में धीरे-धीरे ठंडे मौसम की ओर बदलाव का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
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Created On :   16 Oct 2026 11:33 PM IST












