नीदरलैंड्स बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की ज्यादती के खिलाफ प्रदर्शन

नीदरलैंड्स बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की ज्यादती के खिलाफ प्रदर्शन
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ नीदरलैंड्स की राजधानी एम्स्टर्डम में “फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट” (एफबीएम) ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने दशकों से जारी हिंसा और अत्याचार के खिलाफ न्याय की मांग की।

एम्स्टर्डम, 27 जून (आईएएनएस)। बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ नीदरलैंड्स की राजधानी एम्स्टर्डम में “फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट” (एफबीएम) ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने दशकों से जारी हिंसा और अत्याचार के खिलाफ न्याय की मांग की।

यह प्रदर्शन शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के “यातना पीड़ितों के समर्थन में अंतरराष्ट्रीय दिवस” के अवसर पर डैम स्क्वायर में आयोजित किया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं ने बलूचिस्तान के लोगों के खिलाफ कथित “व्यवस्थित और लंबे समय से अनदेखे” अत्याचार को उजागर किया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शनिवार को प्रदर्शन की तस्वीरें साझा करते हुए एफबीएम के सदस्य असद बलोच ने कहा, "प्रदर्शनकारियों ने बलूच छात्रों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के कथित अपहरणों की निंदा की, जो बिना किसी मुकदमे, आरोप या जानकारी के लापता हो जाते हैं।"

उन्होंने कहा, "कई परिवार वर्षों से, और कुछ मामलों में दशकों से, अपने परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।"

प्रदर्शनकारियों ने “दमनकारी तंत्र” जैसे कथित टॉर्चर सेल, न्यायेतर हत्याओं और मनमानी हिरासतों की भी निंदा की और कहा कि ये घटनाएं अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि एक लंबे पैटर्न का हिस्सा हैं।

एफबीएम ने यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ने, कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की अपील की।

असद बलोच ने कहा कि यह आंदोलन यूरोप में प्रवासी समुदायों द्वारा चलाए जा रहे बढ़ते अभियानों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बलूच मुद्दे को वैश्विक स्तर पर अधिक ध्यान दिलाना है।

इसी अवसर पर एक अन्य मानवाधिकार संगठन “बलूच वॉयस फॉर जस्टिस” (बीवीजे) ने भी यातना पीड़ितों और जबरन गायब किए गए लोगों के परिवारों के प्रति एकजुटता व्यक्त की।

संगठन ने कहा कि बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के कारण लोगों को गंभीर शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है, जबकि उनके परिवार न्याय और सच्चाई से वंचित हैं।

संगठन ने आरोप लगाया कि यातना और बिना कानूनी प्रक्रिया के हिरासत का उपयोग कानून के शासन को कमजोर करता है और मानवीय गरिमा के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बलूचिस्तान लंबे समय से कथित हिंसा, जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं के कारण गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है।

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Created On :   27 Jun 2026 2:47 PM IST

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