पूर्वोत्तर भारत का 'ग्लोबल साउथ' से जुड़ने का द्वार है केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

पूर्वोत्तर भारत का ग्लोबल साउथ से जुड़ने का द्वार है केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को कहा कि पूर्वोत्तर भारत का ग्लोबल साउथ से जुड़ने का द्वार है, और आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के लिए एक रणनीतिक सेतु के रूप में इसमें अपार संभावनाएं हैं।

नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को कहा कि पूर्वोत्तर भारत का ग्लोबल साउथ से जुड़ने का द्वार है, और आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के लिए एक रणनीतिक सेतु के रूप में इसमें अपार संभावनाएं हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ के वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव एनईटीवाईएम 2026 के 15वें संस्करण को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने भारत के विकास पथ में इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने पूर्वोत्तर भारत क्षेत्र को भारत की 'अष्टलक्ष्मी' बताया और इस महोत्सव की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि, प्रतिभा और ऊर्जा को प्रदर्शित करने वाला एक मंच बताया।

केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि पिछले दो वर्षों में उत्तर पूर्वी क्षेत्र के संचार और विकास मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने क्षेत्र की क्षमता के प्रति उनकी समझ को गहरा किया है, और उन्होंने कहा कि यह भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और व्यापक वैश्विक परिदृश्य के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर सकता है।

कार्यक्रम में बोलते हुए, केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्र की मजबूत मानव पूंजी पर प्रकाश डाला, लगभग 93 प्रतिशत के उच्च साक्षरता स्तर की ओर इशारा किया, और सभी क्षेत्रों में विकास को गति देने में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।

पूर्वोत्तर से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को याद करते हुए, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों की अपनी यात्राओं के बारे में बताया और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत की प्रशंसा की।

उन्होंने भूपेन हजारिका और जुबीन गर्ग जैसी प्रख्यात सांस्कृतिक हस्तियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने सरकारी पहलों पर प्रकाश डालते हुए क्षेत्र में युवाओं को सशक्त बनाने और अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

उन्होंने कहा कि इसरो के सहयोग से कार्यान्वित 'नॉर्थईस्ट स्पार्क्स' कार्यक्रम पूर्वोत्तर के 800 छात्रों को प्रतिवर्ष अंतरिक्ष विज्ञान और उन्नत प्रौद्योगिकियों से परिचित कराता है।

अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम पूर्वोत्तर और देश के अन्य हिस्सों के छात्रों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है। इस कार्यक्रम से अब तक 1,200 से अधिक छात्र लाभान्वित हो चुके हैं और आने वाले वर्षों में इसका विस्तार करने की योजना है।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि अप्रैल 2026 में लॉन्च होने वाला 'एडवांसिंग एनईआर पोर्टल' एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा, जो रोजगार के अवसर, करियर के रास्ते, प्रवेश परीक्षा की जानकारी और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और संस्थानों तक पहुंच प्रदान करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर में विकास प्रयासों में अब इरादे से हटकर क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिसमें पहुंच, समावेशन और अवसरों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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Created On :   28 March 2026 10:02 PM IST

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