दक्षिण कोरिया में 80 फीसदी से ज्यादा किशोर-युवा एआई की वजह से परेशान, ऑनलाइन उत्पीड़न के शिकार

दक्षिण कोरिया में 80 फीसदी से ज्यादा किशोर-युवा एआई की वजह से परेशान, ऑनलाइन उत्पीड़न के शिकार
दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के साथ इससे संबंधित खतरा भी दोगुनी रफ्तार से बढ़ता जा रहा है। दक्षिण कोरिया में सोमवार को एक सर्वे किया गया। इस सर्वे में पता चला है कि दक्षिण कोरिया के 80 फीसदी से ज्यादा किशोरों और युवाओं ने ऑनलाइन उत्पीड़न पर चिंता जताई है। इसमें जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का गलत इस्तेमाल शामिल है, जैसे डीपफेक वीडियो बनाना और गलत जानकारी फैलाना।

सोल, 30 मार्च (आईएएनएस)। दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के साथ इससे संबंधित खतरा भी दोगुनी रफ्तार से बढ़ता जा रहा है। दक्षिण कोरिया में सोमवार को एक सर्वे किया गया। इस सर्वे में पता चला है कि दक्षिण कोरिया के 80 फीसदी से ज्यादा किशोरों और युवाओं ने ऑनलाइन उत्पीड़न पर चिंता जताई है। इसमें जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का गलत इस्तेमाल शामिल है, जैसे डीपफेक वीडियो बनाना और गलत जानकारी फैलाना।

कोरिया मीडिया एंड कम्युनिकेशंस कमीशन (केएमसीसी) ने पिछले साल सितंबर से नवंबर के बीच किशोरों और युवाओं पर एक सर्वे किया था। इसके मुताबिक, 89.4 फीसदी किशोरों ने कहा कि वे एआई से होने वाली साइबर हिंसा की गंभीरता को समझते हैं। इसके साथ ही 87.6 फीसदी युवाओं ने भी इस बात को स्वीकार किया।

योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सर्वे चौथी क्लास के एलिमेंट्री स्कूल से लेकर तीसरे साल के हाई स्कूल तक के 9,296 स्टूडेंट्स और 19 से 69 साल के 7,521 बड़ों पर किया गया था।

जवाब देने वालों ने एआई टूल्स से कॉन्टेंट बनाने में आसानी को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया, जबकि बड़ों ने एआई से बने मटेरियल से बार-बार नुकसान होने के खतरे को लेकर डर जताया।

सर्वे में यह भी पता चला कि 2025 में 42.3 फीसदी किशोरों ने किसी न किसी तरह का साइबर उत्पीड़न झेला, जो एक साल पहले के मुकाबले 0.5 फीसदी कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ों के लिए यह आंकड़ा 15.8 फीसदी रहा, जो इसी समय में 2.3 फीसदी ज्यादा है।

चैनल के हिसाब से, किशोरों ने कहा कि वे ज्यादातर टेक्स्ट मैसेज और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर उत्पीड़न के संपर्क में आए, जबकि बड़ों ने बताया कि उन्हें ज्यादातर टेक्स्ट मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए ऐसा ही अनुभव हुआ।

किशोरों और युवाओं दोनों के लिए, ऑनलाइन उत्पीड़न करने वालों में सबसे ज्यादा अजनबी थे, उसके बाद दोस्त थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि केएमसीसी के चेयरमैन किम जोंग-चियोल ने कहा, "साइबर उत्पीड़न सिर्फ ऑनलाइन नैतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मुद्दा है जो लोगों की इज्जत को नुकसान पहुंचा सकता है और संविधान में दिए गए खुशी के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है।" उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म के सही तरीके से इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश करेगी।

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Created On :   30 March 2026 1:20 PM IST

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