आईएमएफ के नियमों के बावजूद पाकिस्तान ने घटाई पेट्रोल लेवी रिपोर्ट

आईएमएफ के नियमों के बावजूद पाकिस्तान ने घटाई पेट्रोल लेवी  रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान से कहा है कि वह डीजल पर सब्सिडी हटाए, क्योंकि बाजार की कीमत से कम पर ईंधन देना उनके लोन की शर्तों के खिलाफ है। इसके बावजूद, इस्लामाबाद ने खुलकर नियमों की अनदेखी करते हुए पेट्रोल पर भी सब्सिडी घटा दी है।

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान से कहा है कि वह डीजल पर सब्सिडी हटाए, क्योंकि बाजार की कीमत से कम पर ईंधन देना उनके लोन की शर्तों के खिलाफ है। इसके बावजूद, इस्लामाबाद ने खुलकर नियमों की अनदेखी करते हुए पेट्रोल पर भी सब्सिडी घटा दी है।

कराची के अखबार डॉन के लेख में कहा गया, “पेट्रोल पर लेवी को कम करने का प्रधानमंत्री का शुक्रवार रात का फैसला यह दिखाता है कि सरकार अपने पुराने आर्थिक खेल पर वापस आ गई है।”

इस कदम से अभी आईएमएफ के ताजा स्टाफ-स्तरीय समझौते पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा, लेकिन लेंडर डीजल की कीमतों में मौजूद असंतुलन को लेकर चिंतित हैं। यह असंतुलन सात मार्च को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हाल की घटनाओं के बाद पहली एडजस्टमेंट के बाद आया और आईएमएफ चाहता है कि इसे जल्दी हटाया जाए।

शुरुआत में सरकार ने डीजल पर पेट्रोलियम लेवी से होने वाली राजस्व की कमी को पेट्रोल पर बढ़े लेवी के जरिए पूरा करने की योजना बनाई थी। डीजल पर लेवी बजट में तय 80 रुपए प्रति लीटर के मुकाबले अभी शून्य है। लेकिन, प्रधानमंत्री ने पेट्रोल पर लेवी 80 रुपए प्रति लीटर घटा दी, ताकि सबको राहत मिले, न कि सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों को।

आईएमएफ ने शुरू में सरकार की ओर से घोषित टारगेटेड सब्सिडी को चुपचाप बर्दाश्त कर लिया, शायद इसलिए क्योंकि इससे लेवी के रेवेन्यू टारगेट को नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, पिछले हफ्ते की घोषणा ने उस स्थिति को काफी बदल दिया है।

इसका मतलब यह है कि सरकार के लिए जनता को राहत देने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता जा रहा है। इस लोकप्रिय कदम से एक बड़ा राजस्व स्रोत कमजोर होगा, जबकि टैक्स कलेक्शन अभी भी लक्ष्य से कम है।

इससे आईएमएफ प्रोग्राम के महत्वपूर्ण लक्ष्य जैसे प्राइमरी सरप्लस पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसलिए कर्ज देने वाले का कमियों को दूर करने पर जोर देना आर्थिक दृष्टि से सही है। इस्लामाबाद की मुश्किलें काफी हद तक खुद की बनाई हुई हैं।

कई सालों तक टैक्स सुधार में देरी और फालतू खर्च को कम करने में संकोच की वजह से सरकार के पास बाहरी झटकों का सामना करने के लिए कम पैसे हैं। वर्तमान तेल कीमतों में वृद्धि और वैश्विक सप्लाई रूट में व्यवधान ने इन कमजोरियों को और उजागर कर दिया है।

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Created On :   8 April 2026 9:21 PM IST

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