केरल चुनाव पिनाराई विजयन ही चेहरा, जीत या हार तय करेगी सियासी विरासत

केरल चुनाव पिनाराई विजयन ही चेहरा, जीत या हार तय करेगी सियासी विरासत
केरल में चुनाव संपन्न हो चुका है और अब नतीजों का इंतजार जारी है। राज्य की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा नाम मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का है। 80 वर्षीय सीपीआई(एम) नेता लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की कोशिश कर रहे हैं, जो राज्य के इतिहास में अब तक कोई हासिल नहीं कर सका है।

तिरुवनंतपुरम, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल में चुनाव संपन्न हो चुका है और अब नतीजों का इंतजार जारी है। राज्य की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा नाम मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का है। 80 वर्षीय सीपीआई(एम) नेता लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की कोशिश कर रहे हैं, जो राज्य के इतिहास में अब तक कोई हासिल नहीं कर सका है।

पिनाराई विजयन की राजनीतिक शैली सख्त और स्पष्ट मानी जाती है, जो उन्हें कांग्रेस के नेताओं से अलग बनाती है। के. करुणाकरण, ए. के. एंटनी और ओम्मन चांडी जैसे नेता अपने सहज स्वभाव और लोगों से जुड़ाव के लिए जाने जाते थे।

सीपीआई(एम) में ई. के. नयनार अपनी हाजिरजवाबी और जनप्रियता के लिए प्रसिद्ध रहे, जबकि वी. एस. अच्युतानंदन गंभीर छवि के बावजूद आम लोगों से मजबूत भावनात्मक जुड़ाव रखते थे।

इसके उलट, पिनाराई विजयन ने एक मजबूत और सख्त नेता की छवि बनाई है। मीडिया से उनके तीखे जवाब, पार्टी और प्रशासन पर कड़ी पकड़ ने उनकी इस छवि को और मजबूत किया है।

दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में झटका मिलने के बाद सीपीआई(एम) ने अपनी रणनीति बदली। साल की शुरुआत से ही सरकार ने बड़े स्तर पर जनसंपर्क और विज्ञापन अभियान चलाया, जिसमें पिनाराई विजयन को प्रमुखता से पेश किया गया। इसका मकसद स्थिरता, विकास और निरंतरता का संदेश देना था।

रिकॉर्ड मतदान, खासकर महिलाओं में 81 प्रतिशत भागीदारी के बीच कांग्रेस-नेतृत्व वाला यूडीएफ जीत को लेकर आत्मविश्वास जताते हुए 140 सदस्यीय विधानसभा में 100 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रहा है। वहीं, वामपंथी नेतृत्व का कहना है कि सरकार के 10 वर्षों के कामकाज को लेकर “शांत समर्थन” मौजूद है और सत्ता में वापसी संभव है।

हालांकि, वाम खेमे के कुछ नेता मान रहे हैं कि मुकाबला उम्मीद से ज्यादा कड़ा है, लेकिन उन्हें अब भी करीब 80 सीटें मिलने की उम्मीद है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव प्रचार में पिनाराई विजयन पर अत्यधिक निर्भरता पार्टी के लिए फायदेमंद भी हो सकती है और नुकसानदायक भी। कुछ का कहना है कि यदि के. के. शैलजा जैसे लोकप्रिय चेहरे को आगे किया जाता, तो तीसरी बार सत्ता में वापसी आसान हो सकती थी।

अब जैसे-जैसे नतीजों का समय करीब आ रहा है, एक बात साफ है- जीत पिनाराई विजयन की राजनीतिक विरासत को और मजबूत करेगी, जबकि हार उनकी रणनीति और नेतृत्व पर बड़े सवाल खड़े करेगी।

इस चुनाव में पिनाराई विजयन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि पूरा जनादेश ही बन गए हैं।

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Created On :   11 April 2026 4:46 PM IST

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