कर्नाटक में वन्यजीव नसबंदी प्रस्ताव पर किसानों का विरोध, वन मंत्री पर साधा निशाना
चामराजनगर, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन्यजीवों की नसबंदी (स्टरलाइजेशन) या एनिमल बर्थ कंट्रोल उपाय लागू करने के प्रस्ताव पर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य गन्ना किसान संघ ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए वन मंत्री ईश्वर खंड्रे पर निशाना साधा है।
संघ के अध्यक्ष भाग्यराज ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार का यह कदम अवैज्ञानिक और अमानवीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन्यजीवों की नसबंदी के नाम पर उन्हें मारने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना असल में जानवरों की खाल और दांत (दांत/दांतों) की तस्करी से जुड़ी हो सकती है और जंगलों के दुरुपयोग का प्रयास है।
गौरतलब है कि वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने हाल ही में राज्य में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए कुछ वन्यजीव प्रजातियों की नसबंदी या इम्यूनो-कॉन्ट्रासेप्शन के उपयोग का प्रस्ताव रखा था। यह प्रस्ताव अप्रैल 2026 में सामने आया, जिसका उद्देश्य हाथियों और तेंदुओं से जुड़ी बढ़ती घटनाओं के बीच मानव जीवन की रक्षा करना और पशु आबादी को बिना क्रूरता के नियंत्रित करना बताया गया है।
इससे पहले किसानों ने मैसूर-चामराजनगर हाईवे को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया और मंत्री के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। उन्होंने इस प्रस्ताव को न केवल अवैज्ञानिक बल्कि अमानवीय भी बताया। किसानों ने यहां तक कहा कि इस तरह का सुझाव देने वाले विशेषज्ञ को मानसिक उपचार की जरूरत है।
किसानों ने स्थानीय विधायकों पुट्टरंगशेट्टी और ए.आर. कृष्णमूर्ति पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि ये नेता राज्य के हितों की अनदेखी कर कैबिनेट पदों के लिए दिल्ली में लॉबिंग करने में लगे हुए हैं।
पत्रकारों से बातचीत में भाग्यराज ने कहा कि यह योजना वन्यजीवों को मारने की साजिश है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी वन्यजीवों की नसबंदी का विरोध किया है, इसलिए मंत्री का बयान अनुचित है और उन्हें इसे वापस लेकर माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष सरकारों की विफलता का परिणाम है और इसका समाधान नसबंदी नहीं हो सकता। उन्होंने वन मंत्री के फैसले को पूरी तरह अवैज्ञानिक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग दोहराई।
भाग्यराज ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि नसबंदी यदि लागू करनी ही है, तो इसे भ्रष्ट लोगों, अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने वालों, और युवाओं को राजनीति में आने से रोकने वालों पर लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि जंगलों में रहने वाले जानवर स्वभाव से हिंसक नहीं होते, लेकिन सफारी, जंगल लॉज, होमस्टे और रिसॉर्ट जैसी गतिविधियों के कारण उनका प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है, जिससे वे रिहायशी इलाकों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं।
किसानों का यह भी कहना है कि गर्मियों में पानी की कमी के कारण भी वन्यजीव जंगलों से बाहर निकलते हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि अन्य राज्यों में इस तरह के नसबंदी प्रयोगों के नकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
इस बीच, इस प्रस्ताव को लेकर राज्य में बहस तेज हो गई है और विभिन्न वर्गों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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Created On :   13 April 2026 5:54 PM IST












