अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने वामपंथी आतंकवाद पर जताई चिंता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान

अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने वामपंथी आतंकवाद पर जताई चिंता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दुनिया के देशों से मिलकर एक इंटरनेशनल अभियान चलाने की अपील की, ताकि बढ़ रहे कट्टर वामपंथी राजनीतिक आतंकवाद का मुकाबला किया जा सके।

वॉशिंगटन, 16 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दुनिया के देशों से मिलकर एक इंटरनेशनल अभियान चलाने की अपील की, ताकि बढ़ रहे कट्टर वामपंथी राजनीतिक आतंकवाद का मुकाबला किया जा सके।

अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता के अनुसार, इस मुद्दे पर हुई एक मंत्री स्तरीय बैठक में भारत सहित 60 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया।

विदेश विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि इस बैठक में 67 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, इजरायल, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया और यूरोप व लैटिन अमेरिका के कई देश शामिल थे। बैठक में राजनीतिक नेताओं, कानून प्रवर्तन अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने राजनीतिक हिंसा के नए तरीकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश विभाग में आयोजित इस बैठक को संबोधित करते हुए रुबियो ने कहा कि पिछले दो दशकों में सरकारों ने कट्टर इस्लामी आतंकवाद के खतरे को काफी हद तक कमजोर किया है, लेकिन राजनीतिक हिंसा के मामले में वामपंथी उग्रवाद को रोकने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

रुबियो ने कहा, "काफी लंबे समय तक हमारी आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक बड़ी कमी रही है। राजनीतिक वामपंथ से जुड़े उग्रवादी हिंसा के खतरे को लेकर हमारी सोच में एक ब्लाइंड स्पॉट रहा है। आज भी कई लोग इस बात को मानने से इनकार करते हैं कि कट्टर वामपंथी आतंकवाद एक गंभीर खतरा हो सकता है। वे इसे दक्षिणपंथी सोच या किसी साजिश की तरह देखते हैं।"

उन्होंने कहा कि हर सरकार की पहली जिम्मेदारी अपने नागरिकों की सुरक्षा करना है और यह जिम्मेदारी राजनीतिक या वैचारिक मतभेदों से ऊपर होनी चाहिए।

रुबियो ने कहा कि 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कारण आईएसआईएस जैसे संगठनों को कमजोर करने में सफलता मिली और अमेरिका व यूरोप में जिहादी हमलों में भी काफी कमी आई।

उन्होंने कहा, "यह खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन इसमें बहुत ज्यादा कमी आई है। आज दुनिया पहले से काफी अलग है।"

रुबियो ने कहा कि अब सरकारों को अपनी आतंकवाद विरोधी रणनीतियों में बदलाव करना होगा, ताकि वे उन संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों से निपट सकें जो उनके अनुसार कट्टर वामपंथी राजनीतिक हिंसा में शामिल हैं।

उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय खतरे का सामना कर रहे हैं। ये लोग आपस में संपर्क करते हैं, बातचीत करते हैं, यात्रा करते हैं, प्रशिक्षण लेते हैं और एक साथ कार्रवाई करते हैं। वे एक ही तरह के ढांचे, दुश्मनों और उद्देश्यों को साझा करते हैं।"

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम नंबर-7 के तहत एंटीफा से जुड़े आतंकी नेटवर्क और उनके सहयोगियों की जांच और उन्हें रोकने के लिए कदम उठाए हैं। रुबियो ने कहा कि विदेश विभाग ने चार हिंसक वामपंथी उग्रवादी संगठनों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है, उनकी फंडिंग रोकने के लिए जानकारी देने वालों को इनाम देने की घोषणा की है और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ नई पहल शुरू की है।

रुबियो ने कहा, "खुफिया जानकारी और सूचनाओं के आदान-प्रदान, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की साझा रणनीति और आर्थिक कार्रवाई के जरिए हम इन नेटवर्कों को एक-एक करके खत्म करेंगे। अब समय आ गया है कि सभ्य दुनिया के लोग अपनी सुरक्षा के लिए एक साथ खड़े हों।"

इस बैठक में व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टाफ स्टीफन मिलर और अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने खुफिया सहयोग बढ़ाने, आर्थिक कार्रवाई करने और राजनीतिक हिंसा का समर्थन करने वाले संगठनों के खिलाफ मिलकर कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया। बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी वित्त विभाग आतंकवादी संगठनों से जुड़े फंडिंग नेटवर्क को रोकने के लिए प्रतिबंधों और वित्तीय उपायों का इस्तेमाल जारी रखेगा।

इस बैठक में भारत की भागीदारी भारत-अमेरिका के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग के महत्व को दिखाती है। 2001 के आतंकी हमलों के बाद से दोनों देशों ने खुफिया जानकारी साझा करने, आंतरिक सुरक्षा सहयोग और कानून प्रवर्तन संबंधों को लगातार मजबूत किया है। दोनों देश द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों के जरिए आतंकवाद से निपटने के लिए साथ काम करते रहे हैं।

भारत-अमेरिका संबंधों में आतंकवाद विरोधी सहयोग हमेशा एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। दोनों देशों की अलग-अलग सरकारों ने समय-समय पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने, जानकारी साझा करने, सुरक्षा क्षमता मजबूत करने और आतंकवादी संगठनों की आर्थिक मदद रोकने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसके साथ ही दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं।

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Created On :   16 July 2026 11:47 PM IST

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