ईरानी लॉन्ग रेंज मिसाइल के निशाने पर ब्रिटेन नहीं पीएम स्टार्मर
लंदन, 23 मार्च (आईएएनएस)। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा है कि फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि मुख्य भूमि ब्रिटेन को ईरान द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता ब्रिटिश हितों की रक्षा करना और मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ने से रोकना है।
दक्षिण-पूर्व लंदन के एक स्कूल के दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में स्टार्मर ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार आकलन करती रहती हैं और अभी तक ऐसा कोई इनपुट नहीं मिला है जिससे यह लगे कि ब्रिटेन सीधे निशाने पर है। यह बयान उस समय आया जब रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान ने सप्ताहांत में डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने के किसी भी प्रयास के लिए ठोस योजना और सावधानीपूर्वक विचार जरूरी होगा। उन्होंने जोर दिया कि सरकार हर संभव विकल्प पर चर्चा कर रही है, खासकर उस बढ़ती महंगाई को देखते हुए जो इस संघर्ष के कारण पैदा हो सकती है।
इस बीच, लंदन में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने अमेरिका व इजरायल के ईरान पर हमलों के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने रसेल स्क्वायर से व्हाइटहॉल तक मार्च किया, बैनर और नारे लगाते हुए हमलों की निंदा की। यह विरोध प्रदर्शन यूरोप भर में बढ़ती असंतोष की लहर का हिस्सा बताया जा रहा है।
उधर, ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एचएमएस एंसन नामक परमाणु-संचालित पनडुब्बी अरब सागर में तैनात की गई है, जो टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों और स्पीयरफिश टॉरपीडो से लैस है। माना जा रहा है कि यह उत्तरी अरब सागर के गहरे पानी में मौजूद है और यदि स्थिति बिगड़ती है तो ब्रिटिश बलों के पास ईरान पर हमला करने की क्षमता भी मौजूद है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री की ओर से अनुमति मिलती है, तो यह पनडुब्बी सतह के करीब आकर मिसाइल दाग सकती है। साथ ही, ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति भी दी है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हो रहे हमलों से जुड़ी मिसाइल क्षमताओं को कमजोर किया जा सके, हालांकि उसने यह भी दोहराया है कि वह व्यापक युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ब्रिटेन का रुख साफ है कि वह एक ओर अपने रणनीतिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में तनाव को और बढ़ने से रोकने की कोशिश भी जारी रखेगा।
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Created On :   23 March 2026 6:52 PM IST












