'राज्य स्थापना दिवस' समारोह राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए एक सार्थक मंच के रूप में उभरे अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल

राज्य स्थापना दिवस समारोह राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए एक सार्थक मंच के रूप में उभरे अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल
अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने शुक्रवार को इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल के तहत विभिन्न राज्यों के राज्य स्थापना दिवस समारोह राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए एक सार्थक मंच के रूप में उभरे हैं।

इटानगर, 1 मई (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने शुक्रवार को इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल के तहत विभिन्न राज्यों के राज्य स्थापना दिवस समारोह राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए एक सार्थक मंच के रूप में उभरे हैं।

उन्होंने कहा कि यह पहल विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों को एक साथ लाती है, जिससे भारत की समृद्ध विविधता में एकता की भावना मजबूत होती है।

शुक्रवार को इटानगर के लोक भवन में गुजरात और महाराष्ट्र के राज्य स्थापना दिवस के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश का राज्य स्थापना दिवस भी बड़े उत्साह और सांस्कृतिक जीवंतता के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विभिन्न राज्यों के राज्य स्थापना दिवस समारोह लोगों को अपने अनुभव साझा करने, एक-दूसरे की आकांक्षाओं को समझने और अपने गृह राज्यों से दूर रहने वाले समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की पहल लोगों को करीब लाती है और राष्ट्रवाद, एकता और सामूहिक जुड़ाव की भावना को भी मजबूत करती है।

राज्यपाल परनाइक और राज्य की प्रथम महिला अनाघा परनाइक ने इस अवसर पर अपनी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई।

अरुणाचल प्रदेश में रह रहे गुजरात, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के बड़ी संख्या में लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

लोक भवन द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल की सच्ची भावना को ध्यान में रखते हुए, आपसी सम्मान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया था।

सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल परनाइक ने अरुणाचल प्रदेश के विकास में इन राज्यों के लोगों के बहुमूल्य योगदान को स्वीकार किया और उसकी सराहना की।

राज्यपाल ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर विचार करते हुए गुजरात के लोगों के साथ साझा किए गए गहरे पौराणिक संबंधों को याद किया, जिन्हें आज भी मनाया जाता है।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के सामाजिक विकास में महाराष्ट्र के लोगों के महत्वपूर्ण योगदान को भी स्नेहपूर्वक याद किया, विशेष रूप से 1962 के युद्ध के बाद के वर्षों में, जब राष्ट्रीय एकजुटता की भावना ने समुदायों के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की एक शानदार प्रस्तुति हुई, जिसने भारत की परंपराओं की विविधता और जीवंतता को प्रदर्शित किया।

मुख्य आकर्षणों में राजीव गांधी विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक अरुणाचली समूह नृत्य शामिल था, जिसने राज्य की स्वदेशी विरासत को खूबसूरती से दर्शाया।

इसके बाद निर्जुली स्थित विवेकानंद केंद्र विद्यालय की मनामी गामलिन द्वारा प्रस्तुत मधुर शास्त्रीय लावणी नृत्य रहा।।

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Created On :   1 May 2026 11:00 PM IST

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