मध्य प्रदेश कूनो में चीते को गोली मारे जाने की जांच के लिए एसटीएफ का गठन

मध्य प्रदेश  कूनो में चीते को गोली मारे जाने की जांच के लिए एसटीएफ का गठन
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के नर चीते को गोली मारने के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वन विभाग ने बुधवार को बताया कि इस घटना की जांच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों को मिलाकर एक स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया गया है।

भोपाल, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के नर चीते को गोली मारने के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वन विभाग ने बुधवार को बताया कि इस घटना की जांच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों को मिलाकर एक स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया गया है।

यह चीता (केएनजी22) मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मर गया। उसे 25 अक्टूबर को श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन के कंपार्टमेंट नंबर 748 से रेस्क्यू किया गया था। वन विभाग के बयान के अनुसार इमरजेंसी सर्जरी के दौरान उसके शरीर से पैलेट गन के पांच छर्रे निकाले गए।

प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (वाइल्डलाइफ) और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन समिता राजोरा ने बताया कि पहले जानवर का एक्स-रे किया गया, जिसमें उसके शरीर में अलग-अलग जगहों पर कई बाहरी वस्तुएं फंसी हुई दिखीं। इसके बाद उसे जबलपुर के नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी के वेटरनरी सर्जरी और रेडियोलॉजी विभाग में विस्तृत जांच और गहन इलाज के लिए भेजा गया।

सीटी स्कैन में पता चला कि बाहरी वस्तुओं ने चीते के अंदरूनी अंगों, मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाया है। समिता राजोरा ने बयान में कहा, "इमरजेंसी सर्जरी की गई, जिसके दौरान उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए।"

सर्जरी और वेटरनरी टीम के लगातार प्रयासों के बावजूद चीते को नहीं बचाया जा सका। समिता राजोरा ने कहा कि घटना की विस्तृत जांच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों वाली एसटीएफ का गठन किया गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि जानवर को किन परिस्थितियों में गोली मारी गई और क्या इसके लिए कोई जिम्मेदार है।

वन विभाग ने अभी संदिग्ध गोलीबारी या किसी आरोपी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। केएनजी22 की मौत के साथ भारत में चीतों की आबादी अब 58 रह गई है, जिसमें कूनो नेशनल पार्क में 52, गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में चार और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीते हैं।

श्योपुर जिले में स्थित कूनो भारत के चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम का मुख्य स्थल है, जो सितंबर 2022 में नामीबिया से चीतों को लाने के साथ शुरू हुआ था। बाद में भारत में इस प्रजाति की स्थायी आबादी बसाने के प्रयासों के तहत दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए, जहां 1952 में चीते विलुप्त घोषित हो गए थे।

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