ओडिशा की घटना का एनएचआरसी ने संज्ञान लिया, क्योंझर कलेक्टर और एसपी को दिए जांच के निर्देश

ओडिशा की घटना का एनएचआरसी ने संज्ञान लिया, क्योंझर कलेक्टर और एसपी को दिए जांच के निर्देश
ओडिशा के क्योंझर जिले में पैसे निकालने के लिए आदिवासी व्यक्ति अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया था। इस झकझोर देने वाली घटना का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। एनएचआरसी ने क्योंझर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को घटना की जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।

भुवनेश्वर, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। ओडिशा के क्योंझर जिले में पैसे निकालने के लिए आदिवासी व्यक्ति अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया था। इस झकझोर देने वाली घटना का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। एनएचआरसी ने क्योंझर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को घटना की जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।

प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज जेना द्वारा 28 अप्रैल को दायर याचिका पर कार्रवाई करते हुए मानवाधिकार आयोग ने क्योंझर कलेक्टर और एसपी को जांच पूरी होने के एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

एनएचआरसी ने ओडिशा ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष को भी इस मामले पर सात दिनों के भीतर एक अलग एटीआर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

जेना ने बताया कि क्योंझर जिले के पटना पुलिस थाना क्षेत्र के डियानाली गांव के 42 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा 27 अप्रैल को ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लिपाशी शाखा में अपनी दिवंगत बहन कलारा मुंडा के खाते से पैसे निकालने गए थे, जिनकी हाल ही में मृत्यु हो गई थी और जिनका कोई कानूनी वारिस नहीं था।

जेना ने आरोप लगाया, "हालांकि, बैंक अधिकारियों ने इनकार कर दिया और कहा कि खाताधारक की 'शारीरिक उपस्थिति' आवश्यक है। व्यथित होकर जीतू मुंडा ने अपनी मृत बहन के दफन अवशेषों को कब्र से निकाला और उन्हें अपने कंधे पर उठाया और बैंक में लेकर पहुंच गए।"

मानवाधिकार कार्यकर्ता ने अपनी शिकायत में मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन और प्रशासनिक असंवेदनशीलता के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।

आयोग ने पाया कि कथित तथ्य जीतू मुंडा के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं, जिन्होंने अत्यधिक मानसिक और भावनात्मक पीड़ा झेली। आयोग ने यह भी पाया कि बैंक अधिकारियों की कार्रवाई मृतक के अधिकारों का भी अनादर करती है।

आयोग ने आगे कहा कि यह घटना गरिमापूर्ण जीवन जीने के मौलिक अधिकार पर प्रहार करती है और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच के माध्यम से आदिवासी समुदायों को मुख्यधारा में एकीकृत करने के चल रहे प्रयासों को कमजोर करती है।

एनएचआरसी के आदेश में कहा गया है, "आयोग इस मामले को गंभीरता से लेता है और क्योंझर के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को जांच करने और एक सप्ताह के भीतर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देता है। आयोग ओडिशा ग्रामीण बैंक, भुवनेश्वर के अध्यक्ष को भी उचित कार्रवाई करने और एक सप्ताह के भीतर इस आयोग को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देता है।"

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Created On :   29 April 2026 8:48 PM IST

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