यूपीआई ने 10 साल में रचा इतिहास, वित्त वर्ष 2017 के 2 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 24,162 करोड़ से अधिक हुए ट्रांजैक्शन्स

यूपीआई ने 10 साल में रचा इतिहास, वित्त वर्ष 2017 के 2 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 24,162 करोड़ से अधिक हुए ट्रांजैक्शन्स
एक आधिकारिक फैक्टशीट में शनिवार को कहा गया कि 10 वर्ष पहले एक साधारण डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुई यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) आज भारत में रोजमर्रा के डिजिटल कारोबार की रीढ़ बन चुकी है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां यूपीआई के जरिए केवल 2 करोड़ लेनदेन (ट्रांजैक्शन) हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई।

नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। एक आधिकारिक फैक्टशीट में शनिवार को कहा गया कि 10 वर्ष पहले एक साधारण डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुई यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) आज भारत में रोजमर्रा के डिजिटल कारोबार की रीढ़ बन चुकी है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां यूपीआई के जरिए केवल 2 करोड़ लेनदेन (ट्रांजैक्शन) हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई।

बयान में कहा गया है कि जन धन, आधार और मोबाइल (जैम ट्रिनिटी) ने भारत में वित्तीय समावेशन और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया। इस पहल के जरिए करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया और उन्हें सरकारी सेवाओं तक आसान और पारदर्शी पहुंच मिली।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से देशभर में बैंकिंग सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ। मार्च 2015 में जन धन खातों की संख्या 14.72 करोड़ थी, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 57.78 करोड़ हो गई। इसी अवधि में इन खातों में जमा राशि 15,670 करोड़ रुपए से बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई।

फैक्टशीट के अनुसार, आधार ने देश में सुरक्षित और त्वरित डिजिटल पहचान उपलब्ध कराई। वर्ष 2010-11 में आधार नामांकन केवल 0.42 करोड़ था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 144 करोड़ से अधिक हो गया। इससे डिजिटल प्रमाणीकरण पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और आसान बना है।

मोबाइल कनेक्टिविटी ने जैम ट्रिनिटी को और मजबूत बनाया तथा देश भर में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाई। मार्च 2026 तक भारत के 85.5 प्रतिशत परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन था, जबकि 109 करोड़ से अधिक लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे थे।

इन तीनों पहलों ने मिलकर डिजिटल इंडिया के समावेशी शासन मॉडल की मजबूत नींव तैयार की। जून 2026 तक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 51 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि 176 करोड़ लाभार्थियों के खातों में सीधे भेजी जा चुकी है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंचा है।

डिजिलॉकर ने कागजी दस्तावेजों की जगह सुरक्षित डिजिटल दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। मार्च 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 70.69 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि 850 करोड़ से अधिक डिजिटल दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं। इससे दस्तावेजों का सत्यापन तेज, कागजरहित और अधिक भरोसेमंद बना है।

बयान में कहा गया है कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और पूरी तरह डिजिटल बना दिया है।

जून 2026 तक जेम पर कुल 18.4 लाख करोड़ रुपए से अधिक का सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) दर्ज किया गया है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 5 लाख करोड़ रुपए का कारोबार शामिल है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए 11 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सरकारी बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिला है।

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Created On :   27 Jun 2026 8:13 PM IST

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