अमेरिका-चीन के बीच शांति कुछ समय के लिए ही हो सकती है पूर्व डिप्लोमैट

अमेरिका-चीन के बीच शांति कुछ समय के लिए ही हो सकती है  पूर्व डिप्लोमैट
दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों की पूर्व सहायक सचिव निशा देसाई बिस्वाल ने कहा है कि ऐसा लगता है कि अमेरिका और चीन अपने संबंधों में स्थिरता लाने की कोशिश कर रहे हैं। यह ज्यादातर आर्थिक वजहों से हो रहा है, लेकिन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बीच टकराव की असली वजहें वैसी ही हैं।

वाशिंगटन, 4 जून (आईएएनएस)। दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों की पूर्व सहायक सचिव निशा देसाई बिस्वाल ने कहा है कि ऐसा लगता है कि अमेरिका और चीन अपने संबंधों में स्थिरता लाने की कोशिश कर रहे हैं। यह ज्यादातर आर्थिक वजहों से हो रहा है, लेकिन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बीच टकराव की असली वजहें वैसी ही हैं।

आईएएनएस के साथ एक खास बातचीत में बिस्वाल ने कहा कि बीजिंग के प्रति वाशिंगटन का मौजूदा नजरिया तनाव को मैनेज करने और ज्यादा भरोसेमंद संबंध बनाने पर केंद्रित है, खासकर इस साल के आखिर में होने वाली राजनीतिक रूप से अहम घटनाओं से पहले।

बिस्वाल ने कहा, "मुझे लगता है कि अमेरिका अभी ऐसे मोड में है, जहां वह चीन के साथ एक स्थिर संबंध बनाना चाहता है। इसके पीछे मजबूत आर्थिक वजहें भी हैं। इस साल के आखिर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका की संभावित यात्रा, बड़ी रणनीतिक असहमतियों के बजाय तुरंत की आर्थिक प्राथमिकताओं से तय हो सकती है।"

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले इस पतझड़ में राष्ट्रपति शी का एक आपसी दौरा कुछ ज्यादा जरूरी आर्थिक मुद्दों पर फोकस करेगा, जिन पर वे निवेश, खेती-बाड़ी के व्यापार वगैरह के मामले में गौर करना चाहेंगे।"

हालांकि, बिस्वाल ने मौजूदा डिप्लोमैटिक बातचीत को वाशिंगटन और बीजिंग के बीच संबंधों में बड़े बदलाव के सबूत के तौर पर देखने के खिलाफ चेतावनी दी।

अमेरिका की पूर्व सहायक विदेश सचिव ने कहा, "फिर से, अमेरिका चीन की बुनियादी बातें नहीं बदली हैं।" उन्होंने सुझाव दिया कि हाल के सालों में आपसी संबंधों को बताने वाले कुछ ज्यादा मुश्किल मुद्दे अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद फिर से उभर सकते हैं।

बिस्वाल ने कहा, "मुझे हैरानी होगी कि मिडटर्म के बाद आप हमारे और चीन के बीच कुछ मुश्किल मुद्दे देख सकते हैं, जो संबंधों में टकराव के पॉइंट के तौर पर फिर से उभर सकते हैं।"

चीन और भारत के संबंध को लेकर बिस्वाल ने कहा कि दोनों एशियाई ताकतों के पास लगातार मतभेदों के बावजूद ज्यादा स्थिरता लाने की वजहें हैं। मुझे लगता है कि उस संबंध में स्टेबिलिटी रखना भारत और चीन दोनों के हित में है।

बिस्वाल के मुताबिक, दोनों सरकारों ने कोऑपरेशन और एंगेजमेंट के सीमित मौकों को एक्सप्लोर करने में दिलचस्पी दिखाई है। हमने सुना है कि दोनों पक्ष आर्थिक और निवेश के मोर्चे पर कुछ सीमित मौके बनाने के मामले में ऐसा करने पर विचार कर रहे हैं, डायरेक्ट एयर रूट और ऐसी ही चीजें।

निशा देसाई बिस्वाल ने चेतावनी दी कि किसी बड़ी सफलता की उम्मीदें कम ही रहनी चाहिए और कहा, "भारत और चीन किस हद तक कॉमन ग्राउंड ढूंढ पाएंगे, इसकी कुछ सीमाएं हैं।"

बिस्वाल ने 2013 से 2017 तक दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए सहायक सचिव के तौर पर काम किया है।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   4 Jun 2026 7:49 PM IST

Tags

Next Story