ईरान समझौते पर सीनेटर सुहास सुब्रमण्यम ने उठाए सवाल, बोले- कई अहम सुरक्षा मुद्दे अब भी अनसुलझे
वाशिंगटन, 17 जून (आईएएनएस)। भारतीय मूल के अमेरिकी सीनेटर सुहास सुब्रमण्यम ने ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच हुए समझौते पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह समझौता मध्य पूर्व में तत्काल तनाव तो कम कर सकता है, लेकिन कई महत्वपूर्ण सुरक्षा चिंताओं का समाधान करने में नाकाम साबित होता दिखाई देता है। अमेरिका के भीतर बढ़ती विभाजनकारी बयानबाजी और नफरत का माहौल भी चिंता का विषय है।
आईएएनएस से बातचीत में डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि इस समझौते का एक सकारात्मक पहलू यह है कि इससे युद्ध और बमबारी की आशंका कम होगी।
हालांकि उन्होंने ट्रंप प्रशासन की बातचीत और समझौता करने की क्षमता पर भरोसा न जताते हुए कहा कि उन्हें इस प्रशासन की वार्ता प्रक्रिया पर ज्यादा विश्वास नहीं है। यह समझौता वर्ष 2015 के उस परमाणु समझौते से भी पीछे का कदम लगता है, जिसमें स्पष्ट और मापने योग्य परिणाम देखने को मिले थे।
सुहास सुब्रमण्यम का मानना है कि हालिया युद्ध ने ईरान को कमजोर करने के बजाय उसे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अधिक प्रभावशाली बना दिया है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के बाद ईरान का दबदबा और बढ़ा है तथा उसे दुनिया के सामने अधिक रणनीतिक लाभ मिला है।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन भले ही इस समझौते को बड़ी सफलता बता रहा हो और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य बनाने की बात कर रहा हो, लेकिन वास्तविक स्थिति इतनी आसान नहीं है। कई जहाज और व्यापारिक कंपनियां अब भी उस क्षेत्र से गुजरने को लेकर चिंतित हैं, इसलिए व्यापार को पूरी तरह सामान्य होने में काफी समय लगेगा।
सीनेटर ने समझौते की सबसे बड़ी कमी बताते हुए कहा कि इससे न तो ईरान के कथित आतंकवाद समर्थन पर कोई असर पड़ता है और न ही उसके परमाणु कार्यक्रम को सीमित किया गया है। उन्होंने कहा कि युद्ध का मुख्य उद्देश्य ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करना बताया गया था, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आता।
सुहास सुब्रमण्यम ने चेतावनी दी कि इस पूरे घटनाक्रम का असर अमेरिका की वैश्विक साख और कूटनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। यह युद्ध अमेरिका की कूटनीतिक विश्वसनीयता को कमजोर कर रहा है और इसके दीर्घकालिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
बातचीत के दौरान उन्होंने भारतीय-अमेरिकी समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती नफरत पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अक्सर उन्हें 'जहां से आए हो, वहीं वापस जाओ' जैसे संदेश मिलते हैं और कुछ लोग उन्हें 'वास्तविक अमेरिकी' तक नहीं मानते।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं और नफरत भरे व्यवहार के खिलाफ समाज और जनप्रतिनिधियों को खुलकर आवाज उठानी चाहिए। सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि झंडा जलाने जैसी घटनाओं या किसी भी प्रकार की घृणा फैलाने वाली गतिविधियों पर चुप नहीं रहा जा सकता।
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Created On :   17 Jun 2026 12:36 PM IST












