ईरान के स्कूल पर हमले को लेकर इलाही की अपील, बोले-अमेरिका ने माफी नहीं मांगी, दुनिया करे निंदा

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि और वरिष्ठ राजनयिक अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए हमले के लिए अमेरिका ने अब तक माफी नहीं मांगी है। उन्होंने दावा किया कि इस हमले में 168 बच्चों की मौत हुई थी और कुछ बच्चों के शव आज तक नहीं मिल सके हैं।
नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के एक सत्र "ए रीजन इन फ्लक्स: हू विल शेप द मिडिल ईस्ट्स फ्यूचर?" में बोलते हुए इलाही ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस हमले की निंदा करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न होने देने की अपील की।
इलाही ने कहा, "हमारे देश और शासन को कई जटिल समस्याओं और संकटों का सामना करना पड़ा है। केवल ईरान और मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई लोग कुछ देशों द्वारा पैदा किए गए युद्धों के कारण पीड़ित हैं। उन्होंने ईरान पर हमला किया और 28 फरवरी को एक प्राथमिक स्कूल पर हमला कर 168 निर्दोष बच्चों की जान ले ली। आज तक कुछ बच्चों के शव नहीं मिले हैं और उनके माता-पिता अब भी रो रहे हैं, क्योंकि उनके पास अपने बच्चों की कोई कब्र तक नहीं है जहां वे जाकर शोक मना सकें।"
28 फरवरी को ईरान के मिनाब स्थित शजरे तैय्यबेह स्कूल पर हुए हमले में 160 से अधिक बच्चों की मौत हुई थी।
इलाही ने कहा, "अक्टूबर में ईरान के स्कूलों का नया शैक्षणिक सत्र शुरू होता है, लेकिन अब वहां वे बच्चे नहीं हैं और लोग इस दुख को झेल रहे हैं। दुर्भाग्य से अमेरिका ने आज तक हमारे प्राथमिक स्कूल पर हमले जैसी बड़ी गलती के लिए माफी नहीं मांगी है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस घटना की जांच के लिए एक समिति भेजी थी और उसकी रिपोर्ट में कहा गया कि इस हमले में 125 बच्चों की मौत हुई थी।"
उन्होंने कहा कि ईरान सभी स्वतंत्र लोगों और मानवाधिकारों में विश्वास रखने वाले लोगों से अपील करता है कि वे ऐसी त्रासदियों की आलोचना करें ताकि यह फिर कभी न दोहराई जाए, चाहे ईरान में हो या किसी अन्य देश में।
इलाही ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर चल रही अटकलों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं और सक्रिय रूप से अपना काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हमारे राष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह बताया था कि उनकी खामेनेई के साथ सात घंटे लंबी बैठक हुई थी। संसद अध्यक्ष भी जल्द भारत आने वाले हैं और उन्होंने भी कहा है कि उनकी हाल ही में कई घंटों तक मुलाकात हुई। मेरे कुछ मित्र भी उनसे मिले हैं और उन्होंने बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपना काम अच्छे तरीके से कर रहे हैं।"
इलाही ने यह भी कहा कि खामेनेई अपने पिता के अंतिम विदाई में मौजूद थे और ईरान में लोगों के साथ प्रदर्शनों में भी शामिल हुए थे। चर्चा में शामिल भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शवेश ने कहा कि फिलिस्तीन "इजराइल के नरसंहार जैसे युद्ध" का सामना कर रहा है और अमेरिका उसे हथियारों तथा राजनीतिक समर्थन के माध्यम से मदद दे रहा है।
उन्होंने कहा, "यह केवल पीड़ा नहीं है, बल्कि नरसंहार है। यह हमारी पसंद का युद्ध नहीं है। सिर्फ इजराइल ही नहीं, कई अन्य देश भी इसमें शामिल हैं जो उसे हथियार उपलब्ध करा रहे हैं। इसमें कोई रहस्य नहीं है कि अमेरिका अब भी इजराइल को हथियार और राजनीतिक समर्थन दे रहा है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका ने छह बार वीटो का इस्तेमाल कर गाजा में हिंसा रोकने के प्रयासों को बाधित किया।
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