मेघालय वीपीपी ने डीजीपी नियुक्ति प्रस्ताव में देरी पर सरकार से सवाल किया
शिलांग, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। विपक्षी वॉइस ऑफ द पीपुल्स पार्टी (वीपीपी) ने गुरुवार को मेघालय सरकार पर राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को प्रस्ताव प्रस्तुत करने में कथित देरी पर सवाल उठाया। वीपीपी ने चयन प्रक्रिया की स्थिति पर स्पष्टीकरण भी मांगा।
वीपीपी प्रवक्ता ए.डब्ल्यू रानी ने राष्ट्रीय जन पार्टी (एनपीपी) के नेतृत्व वाली सरकार से राज्य के पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने हेतु उठाए गए कदमों का स्पष्टीकरण देने का आग्रह किया।
पार्टी ने दावा किया कि यूपीएससी ने सितंबर में राज्य सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया था कि डीजीपी की नियुक्ति का प्रस्ताव अभी भी प्रतीक्षित है और पुलिस प्रमुखों के चयन संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने का आह्वान किया था।
रानी ने सवाल किया कि आयोग के पत्र के बावजूद सरकार ने कथित तौर पर आवश्यक औपचारिकताओं को शुरू या पूरा क्यों नहीं किया।
रानी ने कहा कि इससे यह मूलभूत प्रश्न उठता है कि यूपीएससी द्वारा बार-बार संपर्क किए जाने के बावजूद मेघालय सरकार आवश्यक कदम उठाने में विफल क्यों रही है।
वीपीपी ने राज्य सरकार और आयोग के बीच हुए पत्राचार का विवरण और प्रस्ताव तैयार करने और प्रस्तुत करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी। इसने सरकार से कथित देरी के कारणों को स्पष्ट करने को भी कहा।
यह विवाद नियमित पुलिस प्रमुख के चयन की प्रक्रिया को लेकर है, जिसके तहत यूपीएससी द्वारा विचार के लिए योग्य अधिकारियों का एक पैनल तैयार किया जाता है।
यह मुद्दा तब और भी महत्वपूर्ण हो गया है जब मेघालय में वर्तमान डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग का विस्तारित कार्यकाल समाप्त होने वाला है।
नोंगरांग को 20 मई, 2024 से शुरू होकर 19 मई, 2026 को समाप्त होने वाले दो साल के कार्यकाल के लिए इस पद पर नियुक्त किया गया था। केंद्र ने बाद में उनकी सेवा अवधि में छह महीने का विस्तार स्वीकृत किया, जिससे वे 19 नवंबर, 2026 तक पद पर बनी रह सकेंगी।
विस्तारित कार्यकाल की समाप्ति के निकट आने पर वीपीपी ने यह स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या समय पर नियुक्ति सुनिश्चित करने और राज्य के पुलिस नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
पार्टी की इस मांग ने नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में सरकार के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, वीपीपी द्वारा उद्धृत देरी के आरोप और आयोग के संचार के विवरण उपलब्ध जानकारी में स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुए हैं।
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Created On :   15 Oct 2026 9:00 PM IST












