पश्चिम एशिया तनाव का असर कोयंबटूर से आम निर्यात प्रभावित, कीमतों में भारी गिरावट से व्यापारियों को नुकसान

पश्चिम एशिया तनाव का असर कोयंबटूर से आम निर्यात प्रभावित, कीमतों में भारी गिरावट से व्यापारियों को नुकसान
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने कोयंबटूर से आम के निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। निर्यात प्रभावित होने से व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह वह समय है जिसे सामान्‍य तौर पर निर्यात का सबसे अच्छा मौसम माना जाता है।

कोयंबटूर, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने कोयंबटूर से आम के निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। निर्यात प्रभावित होने से व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह वह समय है जिसे सामान्‍य तौर पर निर्यात का सबसे अच्छा मौसम माना जाता है।

इसका सबसे ज्‍यादा असर उक्कडम आम मार्केट में देखने को मिला है। यह इस इलाके के मुख्य व्यापारिक केंद्रों में से एक है, जहां अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क में रुकावटों के कारण निर्यात की मात्रा में भारी गिरावट आई है।

मौसम की शुरुआत में, निर्यातक आम तौर पर खाड़ी देशों को रोजाना 60 टन से ज्‍यादा आम भेजते हैं। हालांकि, अभी निर्यात की मात्रा गिरकर रोजाना पांच टन से भी कम रह गई है।

इस सुस्ती की वजह दुबई, अबू धाबी और शारजाह जैसे मुख्य ठिकानों के लिए कार्गो उड़ानों में लंबे समय से आ रही रुकावटों को माना जा रहा है। इससे जल्दी खराब होने वाले सामानों की आवाजाही पर काफी बुरा असर पड़ा है।

निर्यात में आई इस भारी गिरावट के कारण आम की सभी किस्मों की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है। अल्‍फांसो आम जो पहले लगभग 300 रुपये प्रति किलोग्राम बिकते थे, अब लगभग 150 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहे हैं।

बंगनपल्ली किस्मों की कीमतें 120-150 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 50-70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं, जबकि सेंथुरम (सिंधुरा) आम की कीमतें 150-170 रुपये से गिरकर 60-80 रुपये हो गई हैं।

इमाम पसंद किस्मों की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। इनकी कीमतें 200-240 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 100-130 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं।

वहीं, तोतापुरी आम, जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रोसेसिंग उद्योगों में होता है, की कीमतें भी तेजी से गिरकर 15-25 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं।

निर्यात के रास्ते बंद होने के कारण, बड़ी मात्रा में बिना बिके आम घरेलू बाजार में आ गए हैं। इससे बाजार में आम की सप्लाई बहुत ज्‍यादा हो गई है, जिससे कीमतें और भी नीचे गिर गई हैं।

आम के जल्दी खराब होने की प्रकृति ने इस समस्या को और भी बढ़ा दिया है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट में देरी होने से आम अक्सर खराब हो जाते हैं और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

इस साल आम का मौसम देर से शुरू होने के कारण स्थिति और भी खराब हो गई है, जिससे मुनाफेदार बिक्री के लिए उपलब्ध समय कम हो गया है। आम तौर पर, यह मौसम मार्च से जुलाई तक चलता है और इस दौरान निर्यात की जबरदस्त मांग रहती है, खासकर रमजान से पहले, जब खाड़ी के बाजार बड़ी मात्रा में आम आयात करते हैं।

हालांकि, इस साल लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतों की वजह से मांग कम रही है। घरेलू बाजार में कुछ समय के लिए राहत मिली है, जिसकी वजह चिथिरई कानी, तमिल नव वर्ष और विशु के दौरान त्योहारों की मांग है। हाल के दिनों में लगभग 150 टन माल बिका है।

इसके बावजूद, व्यापारियों को लगातार बढ़ते नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि स्थानीय बिक्री निर्यात से होने वाली कमाई में आई भारी गिरावट की भरपाई करने के लिए काफी नहीं है।

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Created On :   11 April 2026 3:34 PM IST

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