इम्तियाज अली ने श्याम बेनेगल को बताया सबसे बड़ा प्रेरक, कहा-'उनकी फिल्मों में असली हिंदुस्तान दिखता है'

इम्तियाज अली ने श्याम बेनेगल को बताया सबसे बड़ा प्रेरक, कहा-उनकी फिल्मों में असली हिंदुस्तान दिखता है
मशहूर फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली अपनी रोमांटिक कहानियों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाए हुए हैं। उनकी फिल्मों में गहरा रोमांस, आत्म-खोज, यात्रा और सुंदर संगीत का अनोखा मेल होता है। इन फिल्मों के जरिए पात्र अपनी आंतरिक उलझनों को समझते और जीवन को नए नजरिए से देखते हैं।

मुंबई, 31 मार्च (आईएएनएस)। मशहूर फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली अपनी रोमांटिक कहानियों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाए हुए हैं। उनकी फिल्मों में गहरा रोमांस, आत्म-खोज, यात्रा और सुंदर संगीत का अनोखा मेल होता है। इन फिल्मों के जरिए पात्र अपनी आंतरिक उलझनों को समझते और जीवन को नए नजरिए से देखते हैं।

इम्तियाज अली ने हाल ही में श्याम बेनेगल को अपना सबसे बड़ा प्रेरक बताया। मंगलवार को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में इम्तियाज ने कहा कि कई फिल्मकार दूसरों को प्रभावित करते हैं लेकिन श्याम बेनेगल उनमें सबसे अलग हैं।

इम्तियाज ने कहा, "श्याम बेनेगल में एक खास जुनून दिखता है। आप शशि कपूर, नसीरुद्दीन शाह और नफीसा अली जैसी अदाकारी देखें। रस्किन बॉन्ड की कहानी 'अ फ्लाइट ऑफ पिजन्स' पर बनी उनकी फिल्म हो या फिर 'त्रिकाल' और 'मंथन' जैसी फिल्में, जुनून साफ झलकता है।"

उन्होंने बताया, "अगर आप श्याम बेनेगल के सच्चे फैन हैं, तो उनकी किसी भी फिल्म को देखिए। उनमें आपको एक हिंदुस्तान, अच्छा इंसान, रिश्तों की निरंतरता, प्रमाणिकता और शानदार फिल्ममेकिंग देखने को मिलेगा। उनकी फिल्में सच्चाई से भरी होती हैं।"

इम्तियाज अली ने कहा कि इन फिल्मों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उन्होंने बिमल रॉय और राज कपूर की फिल्मों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "इंटरनेट से फायदा उठाओ, नुकसान तो बहुत हैं।"

श्याम बेनेगल भारतीय सिनेमा के उन दिग्गजों में से एक हैं जिन्होंने यथार्थवादी, सामाजिक मुद्दों पर आधारित और सशक्त महिला पात्रों वाली होती थीं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में 'समानांतर सिनेमा' (पैरेलल सिनेमा) की नींव रखी। अंकुर (1974) से शुरुआत कर उन्होंने सामंतवाद, जातिवाद, मंडी में वेश्यावृत्ति की हकीकत और मम्मो में बुजुर्गों के संघर्ष को बखूबी दिखाया। उनकी फिल्मों में कहानी विश्वसनीय और जमीनी होती थी।

अंकुर', 'निशांत', 'मंथन', 'भूमिका', 'जुनून', 'मंडी', और 'सूरज का सातवां घोड़ा' उनकी कुछ बेहतरीन फिल्में मानी जाती हैं। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, स्मिता पाटिल और अमरीश पुरी जैसे कलाकारों को मुख्यधारा की हिंदी फिल्मों में स्थापित किया।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   31 March 2026 1:22 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story