भारतीय शेयर बाजार लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद बढ़त के साथ बंद; सेंसेक्स 76,500 के पार

भारतीय शेयर बाजार लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद बढ़त के साथ बंद; सेंसेक्स 76,500 के पार
भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद बढ़त के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 362.57 अंक या 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 और निफ्टी 24.25 अंक या 0.10 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ।

मुंबई, 4 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद बढ़त के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 362.57 अंक या 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 और निफ्टी 24.25 अंक या 0.10 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ।

दिन के दौरान बाजार में तेजी का नेतृत्व मेटल और कमोडिटीज ने किया। सूचकांकों में निफ्टी मेटल (1.07 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (0.55 प्रतिशत) की तेजी के साथ टॉप गेनर्स थे। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.49 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.39 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (0.30 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (0.28 प्रतिशत), निफ्टी ऑयल एंड गैस (0.21 प्रतिशत) और निफ्टी पीएसई (0.04 ) प्रतिशत की मजबूती के साथ हरे निशान में बंद हुए।

दूसरी तरफ निफ्टी रियल्टी (0.90 प्रतिशत), निफ्टी हेल्थकेयर (0.87 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (0.68 प्रतिशत), निफ्टी आईटी (0.47 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (0.45 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (0.44 प्रतिशत) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (0.43 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 156.15 अंक या 0.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63,079.05 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 44.70 अंक या 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 20,095.45 पर था।

जानकारों ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका कम होने से भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखी गई। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूली और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेजी सीमित रही। निवेशकों की नजर आज आने वाले अमेरिकी रोजगार के आंकड़ों पर है, जबकि ब्याज दरों के भविष्य का अंदाजा लगाने के लिए अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी खुदरा महंगाई के आंकड़े अहम होंगे। अगस्त में कोर महंगाई दर में मामूली गिरावट की आम उम्मीदों से फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने का सिलसिला रुकने की संभावना मजबूत हो सकती है और इससे बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव को काबू में रखने में मदद मिल सकती है।

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Created On :   4 Sept 2026 4:07 PM IST

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