ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अजरबैजान को भाईचारे वाला राष्ट्र बताया

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अजरबैजान को भाईचारे वाला राष्ट्र बताया
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देश अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ हुई बातचीत में अज़रबैजान सरकार और जनता की ओर से दिखाए गए समर्थन और सहानुभूति की सराहना की।

नई द‍िल्‍ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देश अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ हुई बातचीत में अज़रबैजान सरकार और जनता की ओर से दिखाए गए समर्थन और सहानुभूति की सराहना की।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट में कहा,''अपने भाई अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ बातचीत में मैंने अजरबैजान की सरकार और वहां की जनता की सहानुभूति और समर्थन की सराहना की। मित्र और भाईचारे वाले राष्ट्र कठिन समय में एक-दूसरे का साथ देते हैं, और इन संबंधों की सभ्यतागत जड़ें जितनी गहरी होती हैं, यह बंधन उतना ही अधिक मजबूत होता है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक अन्‍य पोस्‍ट में अजरबैजान के पूर्व राष्ट्रपति हैदर अलीयेव से हुई बातचीत का ज‍िक्र क‍िया।

उन्‍होंने ल‍िखा, ''अपने भाई हैदर अलीयेव के साथ हुई बातचीत में मैंने अज़रबैजान गणराज्य की सरकार और वहां की जनता की सहानुभूति और समर्थन के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। मित्र और भाईचारे वाले राष्ट्र, कठिनाई और संकट के समय में एक-दूसरे को फिर से पहचानते हैं; और इन संबंधों की सभ्यतागत जड़ें जितनी गहरी होती हैं, यह बंधन उतना ही अधिक सुदृढ़ होता जाता है।

पेज़ेशकियन ने एक द‍िन पहले द‍िए अपने बयान में कहा था क‍ि ईरानी जनता अमेरिकी लोगों के प्रति कोई दुश्मनी नहीं रखती है। वहीं, उन्होंने अमेरिकी प्रशासन पर ईरान के खिलाफ “इज़रायल के प्रतिनिधि (प्रॉक्सी)” के रूप में लड़ने का आरोप लगाया।

पेज़ेशकियन ने कहा, “ईरानी लोग अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों सहित किसी भी अन्य राष्ट्र के प्रति दुश्मनी नहीं रखते।” उन्होंने कहा, “अपने गौरवशाली इतिहास के दौरान बार-बार विदेशी हस्तक्षेप और दबावों का सामना करने के बावजूद, ईरानियों ने हमेशा सरकारों और उनके लोगों के बीच स्पष्ट अंतर किया है।”

पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरान ने “अपने आधुनिक इतिहास में कभी भी आक्रामकता, विस्तारवाद, उपनिवेशवाद या प्रभुत्व का रास्ता नहीं चुना,” जबकि उसे वैश्विक शक्तियों द्वारा कब्जे, आक्रमण और दबाव का सामना करना पड़ा है।

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Created On :   3 April 2026 11:58 PM IST

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