जौहर यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण मामला प्रबंधन ने कमिश्नर कोर्ट में दी चुनौती, सपा भी मैदान में कूदी
रामपुर, 22 जुलाई (आईएएनएस)। मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 भवनों को ध्वस्त करने के रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मुरादाबाद मंडलायुक्त (कमिश्नर) की अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
प्रबंधन ने ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए अपील दाखिल की है, जिस पर 28 जुलाई को सुनवाई होगी। इस बीच समाजवादी पार्टी ने भी कार्रवाई के विरोध में 23 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय के नेतृत्व में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रामपुर भेजने का ऐलान किया है।
रामपुर विकास प्राधिकरण के ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती देते हुए मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की ओर से मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट में अपील दाखिल की गई है। विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता जुनैद एजाज ने बताया कि अपील दायर की गई है और मामले में 28 जुलाई को सुनवाई निर्धारित की गई है।
अधिवक्ता का कहना है कि पूरा विवाद गांव सिंघन खेड़ा से जुड़ा है, जिसे 27 सितंबर 2024 को रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया, जबकि विश्वविद्यालय के संबंधित भवन वर्ष 2018 में निर्मित किए गए थे। ऐसे में इन निर्माणों पर आरडीए के प्रावधान लागू नहीं हो सकते। उन्होंने दावा किया कि संबंधित क्षेत्र में न तो कोई मास्टर प्लान लागू है और न ही जोनल डेवलपमेंट प्लान।
प्रबंधन का यह भी तर्क है कि संबंधित क्षेत्र नियंत्रित ग्राम क्षेत्र (कंट्रोल्ड विलेज एरिया) में नहीं आता, इसलिए भवन निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की बाध्यता नहीं थी।
अधिवक्ता ने कहा कि यदि मान भी लिया जाए कि किसी प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है, तब भी नियमानुसार अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना ही लगाया जा सकता है, ध्वस्तीकरण का आदेश नहीं।
उल्लेखनीय है कि रामपुर विकास प्राधिकरण के क्षेत्रीय अवर अभियंता ने 28 जून को वाद दर्ज कर मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के सचिव और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया था। उन्हें 8 जुलाई तक 38 भवनों के स्वीकृत नक्शे प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।
विश्वविद्यालय की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद व्यक्तिगत सुनवाई हुई, जिसके उपरांत जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने 38 भवनों को अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया। प्राधिकरण का दावा है कि जांच में विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 भवन बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित पाई गईं।
इधर, समाजवादी पार्टी ने भी इस मामले में सक्रिय रुख अपनाया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर 23 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रामपुर जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मुलाकात कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग करेगा और ज्ञापन सौंपेगा। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगा। स्थानीय स्तर पर भी विश्वविद्यालय को लेकर समर्थन के स्वर सामने आए हैं। कुछ रामपुरवासियों ने विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने के बजाय सरकार से इसका अधिग्रहण (टेकओवर) करने की मांग की है। वहीं, उन्होंने आजम खान से भी विश्वविद्यालय को राष्ट्रहित में देश को सौंपने की अपील की है।
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Created On :   22 July 2026 12:35 PM IST












