जवानों के लिए पौष्टिक और सुरक्षित भोजन, खाद्य मानकों में सुधार पर मंथन
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। आपातकालीन स्थिति में विमान से गिराए जाने वाले भोजन से लेकर दुर्गम इलाकों तक पहुंचने वाले राशन की गुणवत्ता पर सेना ने बड़ा मंथन किया है। दरअसल दुर्गम पहाड़ों में तैनात जवानों समेत हर एक परिस्थिति में सैनिकों तक सुरक्षित और पौष्टिक भोजन पहुंचाना भारतीय सेना की प्राथमिकता है।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सेना ने अपने खाद्य मानकों की व्यापक समीक्षा की है। यहां खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, लंबे समय तक सुरक्षित रखने और कठिन परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। सेना की क्वार्टर मास्टर जनरल शाखा के तत्वावधान में आयोजित खाद्य पदार्थों से संबंधित तकनीकी मानकीकरण समिति की बैठक में 276 विषयों पर विचार किया गया। इनमें रक्षा खाद्य मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण के मानकों से जुड़े विषय शामिल थे।
बैठक में केवल भोजन की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि यह भी देखा गया कि कठिन मौसम, लंबी दूरी के परिवहन और चुनौतीपूर्ण भंडारण के दौरान भोजन की पौष्टिकता तथा उपयोगिता कैसे बरकरार रखी जाए। खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग, संरक्षण, स्वाद और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने वाली तकनीकों पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से विमान से गिराकर पहुंचाए जाने वाले और जवानों द्वारा अपने साथ ले जाए जाने वाले राशन की जरूरतों पर ध्यान दिया गया।
सेना की आपूर्ति एवं परिवहन व्यवस्था के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश चड्ढा ने बताया कि हाल के वर्षों में सैनिकों के राशन की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई पहल की गई हैं। इनमें ‘भारत चावल’ की उपलब्धता, अग्निवीरों के लिए अतिरिक्त राशन और कठिन परिचालन परिस्थितियों में तैनात जवानों के लिए विशेष राशन शामिल हैं। अब सेना खाद्य सामग्री के संरक्षण, भंडारण और प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों की उपयोगिता पर मैदानी परीक्षण कर रही है। इनका उद्देश्य ऐसी तकनीकों की पहचान करना है, जो कठिन जलवायु वाले क्षेत्रों में भी राशन को सुरक्षित रखने में मदद करें।
सैनिकों के राशन में जैविक खाद्य पदार्थ शामिल करने की योजना भी है। इसके लिए अलग रक्षा खाद्य मानक बनाए जाएंगे। बैठक में क्वार्टर मास्टर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल प्रशांत श्रीवास्तव ने मुख्य संबोधन दिया। इसमें विभिन्न रक्षा संस्थानों, खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों और वैज्ञानिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा में रक्षा खाद्य मानकों को राष्ट्रीय गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप बनाने पर भी जोर दिया गया।
इस पूरी कवायद का लक्ष्य सिर्फ राशन की गुणवत्ता तय करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सेना का जवान जहां भी तैनात हो, वहां की कठिन परिस्थितियां उसके भोजन की सुरक्षा और गुणवत्ता के आड़े न आएं।
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Created On :   14 Oct 2026 7:06 PM IST












